Stock Market Crash: शेयर बाजार में हाहाकार, सेंसेक्स 76,503 पर बंद; एक दिन में ₹8 लाख करोड़ की संपत्ति साफ

Stock Market Crash: भारतीय शेयर बाजार के निवेशकों के लिए बुधवार का दिन किसी बुरे सपने की तरह साबित हुआ। हफ्ते के तीसरे कारोबारी दिन दलाल स्ट्रीट पर ऐसा हाहाकार मचा

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Stock Market Crash: शेयर बाजार में हाहाकार, सेंसेक्स 76,503 पर बंद
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Stock Market Crash: भारतीय शेयर बाजार के निवेशकों के लिए बुधवार का दिन किसी बुरे सपने की तरह साबित हुआ। हफ्ते के तीसरे कारोबारी दिन दलाल स्ट्रीट पर ऐसा हाहाकार मचा कि देखते ही देखते बाजार ताश के पत्तों की तरह बिखर गया। बुधवार को बाजार बंद होने पर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स (Sensex) 1677.12 अंक या 2.15% की भारी गिरावट के साथ 76,503.60 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी (Nifty 50) भी 516.65 अंक का बड़ा गोता लगाकर 23,882.05 पर सिमट गया।

बाजार में आई इस सुनामी के चलते महज चंद घंटों के भीतर निवेशकों के लगभग 8 लाख करोड़ रुपये डूब गए, जिसने हाल के महीनों में हुई पूरी रिकवरी पर पानी फेर दिया।

आखिरी घंटे में ट्रंप का बयान और बाजार में ‘ब्लडबाथ’
बुधवार सुबह जब बाजार खुला तो मामूली गिरावट देखी जा रही थी, लेकिन दोपहर बाद आखिरी कारोबारी घंटे में बिकवाली का दबाव अचानक चरम पर पहुंच गया। इस भारी गिरावट के पीछे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक बयान रहा, जिसने वैश्विक भू-राजनीतिक (Geopolitical) समीकरणों को पूरी तरह हिला कर रख दिया।

मंगलवार तक जहां अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता की खबरें आ रही थीं, वहीं बुधवार को राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ कह दिया कि ईरान के साथ सीजफायर (युद्धविराम) का समझौता अब ‘खत्म’ हो चुका है। उन्होंने ईरानी नेतृत्व पर तीखे हमले करते हुए कहा कि उनके साथ बातचीत करना सिर्फ समय की बर्बादी है। इस बयान के सामने आते ही ग्लोबल मार्केट समेत भारतीय शेयर बाजार में पैनिक सेलिंग (अफरातफरी में बिकवाली) शुरू हो गई।

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बाजार क्रैश होने के 5 मुख्य कारण

शेयर बाजार में आई इस ऐतिहासिक गिरावट के पीछे मुख्य रूप से पांच ट्रिगर्स ने काम किया

1. अमेरिका-ईरान तनाव और ट्रंप का कड़ा रुख
होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में व्यावसायिक जहाजों पर हुए हमलों के बाद अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव की स्थिति बन गई है। ट्रंप द्वारा किसी भी नई डील से इनकार करने के बाद मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में पूर्ण युद्ध छिड़ने की आशंका गहरा गई है, जिससे निवेशकों का सेंटिमेंट पूरी तरह बिगड़ गया।

2. कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में लगी आग
जंग के खतरों के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent Crude) की कीमतें 5% से ज्यादा उछलकर 78 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गईं। भारत अपनी जरूरत का 80% से ज्यादा तेल आयात करता है, इसलिए कच्चे तेल का महंगा होना भारतीय अर्थव्यवस्था और कॉर्पोरेट मुनाफे के लिए सीधा झटका माना जाता है।

3. भारतीय कूपर (Rupee) का रिकॉर्ड निचला स्तर
वैश्विक अनिश्चितता के कारण निवेशकों ने सुरक्षित निवेश के रूप में अमेरिकी डॉलर का रुख किया। इसके चलते डॉलर इंडेक्स मजबूत हुआ और भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 20 पैसे कमजोर होकर 95.16 के सर्वकालिक निचले (Record Low) स्तर पर बंद हुआ। कमजोर रुपये से विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) के बाहर जाने का खतरा बढ़ जाता है।

4. अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल
अमेरिका में 10 साल की ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड बढ़कर 4.56% और 30 साल की यील्ड 5.06% पर पहुंच गई। जब बॉन्ड यील्ड बढ़ती है, तो विदेशी निवेशक शेयर बाजार जैसे जोखिम भरे एसेट्स से पैसा निकालकर सरकारी बॉन्ड में लगाने लगते हैं, जो सुरक्षित रिटर्न देते हैं।

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5. चौतरफा बिकवाली और प्रॉफिट बुकिंग
बीते चार सत्रों में बाजार लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा था, जहां सेंसेक्स ने करीब 1800 अंकों की बढ़त बनाई थी। इस ऊंचे वैल्यूएशन पर जैसे ही खराब वैश्विक खबरें आईं, संस्थागत और खुदरा निवेशकों ने जमकर प्रॉफिट बुकिंग (मुनाफावसूली) की।

दिग्गज शेयरों का हाल: रिलायंस से लेकर HDFC तक बिखरे
बाजार की इस गिरावट में कोई भी बड़ा सेक्टर खुद को बचा नहीं सका। निफ्टी बैंक, निफ्टी एफएमसीजी और निफ्टी ऑयल एंड गैस इंडेक्स में 2-2 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई।

मार्केट हैवीवेट शेयर जैसे Reliance Industries, HDFC Bank, TCS, Infosys, Tech Mahindra, और IndiGo में भारी बिकवाली देखी गई। इन बड़ी कंपनियों के शेयरों में 2 से 4 फीसदी तक की गिरावट आई, जिसने अकेले इंडेक्स को 800 अंक से ज्यादा नीचे धकेल दिया। दूसरी तरफ, बाजार के इस दौर में केवल चुनिंदा फार्मा और डिफेंस शेयर ही मामूली बढ़त बना सके।

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विशेषज्ञों की सलाह: अब निवेशक क्या करें?
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि जब तक मिडिल ईस्ट का तनाव शांत नहीं होता, तब तक बाजार में अस्थिरता (Volatility) बनी रहेगी।

एक्सपर्ट टेक: खुदरा निवेशकों को इस गिरावट में घबराकर पैनिक सेलिंग नहीं करनी चाहिए। अगर आप लंबी अवधि के निवेशक हैं, तो यह गिरावट अच्छे और मजबूत फंडामेंटल वाले लॉर्जकैप शेयरों को निचले स्तरों पर धीरे-धीरे (SIP मोड में) खरीदने का बेहतरीन मौका हो सकती है। फिलहाल बड़ी एकमुश्त (Lumpsum) रकम लगाने से बचें।

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