Wayanad Landslide: केरल का पहाड़ी जिला वायनाड एक बार फिर प्राकृतिक और प्रशासनिक लापरवाही की मार झेल रहा है। वायनाड के मेप्पदी (Meppadi) के पास कल्लाडी (Kalladi) में निर्माणाधीन टनल रोड प्रोजेक्ट (Anakkampoyil-Kalladi-Meppadi Tunnel Project) साइट पर मंगलवार को एक भीषण भूस्खलन (Landslide) हुआ। इस दर्दनाक हादसे में अब तक दो लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कई अन्य लोग मलबे में दबे हुए हैं।
सोशल मीडिया पर इस घटना का एक रोंगटे खड़े कर देने वाला वीडियो भी वायरल हो रहा है, जिसमें सुरंग की खुदाई से निकली अस्थिर मिट्टी और मलबे का एक बहुत बड़ा सैलाब नीचे की ओर बहता हुआ दिखाई दे रहा है। इस सैलाब ने रास्ते में आने वाले बड़े ईंधन टैंकर और कई गाड़ियों को तिनके की तरह बहा दिया।
मलबे में दबे कई मजदूर, युद्ध स्तर पर रेस्क्यू जारी
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन, पुलिस, फायर एंड रेस्क्यू सर्विसेज और राष्ट्रीय आपदा अनुक्रिया बल (NDRF) की टीमें मौके पर पहुंच गईं। शुरुआती दौर में स्थानीय निवासियों ने तत्परता दिखाते हुए मलबे से कुछ लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। अस्पताल के सूत्रों के मुताबिक, घायल मजदूरों को इलाज के लिए मेप्पदी विम्स (WIMS) अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
ताजा रिपोर्ट के अनुसार, टनल निर्माण में लगे करीब 7 से अधिक कर्मचारी और सुपरवाइजर अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। मौके पर भारी मात्रा में जमा कीचड़ और मलबे को हटाने के लिए कई JCB (अर्थमूवर्स) मशीनों को लगाया गया है। हालांकि, मौसम विभाग द्वारा वायनाड और कोझिकोड जिलों में जारी किए गए ‘रेड अलर्ट’ और लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन में भारी बाधा आ रही है।
‘इंसानी लापरवाही का नतीजा’ — सरकार ने खड़े किए सवाल
केरल के कृषि मंत्री टी. सिद्दीकी ने इस घटना स्थल का दौरा करने के बाद इसे एक प्राकृतिक आपदा मानने से इनकार कर दिया। उन्होंने साफ तौर पर इसे “मानव निर्मित आपदा” (Man-made Disaster) करार दिया है।
मंत्री टी. सिद्दीकी का बयान: “यह कोई प्राकृतिक भूस्खलन नहीं है। यह टनल प्रोजेक्ट के तहत निकाली गई मिट्टी और मलबे को अवैज्ञानिक तरीके से एक जगह जमा करने का नतीजा है। जिला कलेक्टर ने कोंकण रेलवे (Konkan Railways) को लिखित में चेतावनी दी थी कि इस जमा मिट्टी के कारण भूस्खलन हो सकता है और इसे तुरंत हटाया जाए, लेकिन ठेकेदारों ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया। ऐसी लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
मुख्यमंत्री वी.डी. सतीसन ने भी इस घटना पर दुख व्यक्त करते हुए एक आपातकालीन बैठक की। उन्होंने राजस्व मंत्री ए.पी. अनिल कुमार और टी. सिद्दीकी को तुरंत वायनाड पहुंचकर राहत कार्यों की कमान संभालने का निर्देश दिया है। सरकार का कहना है कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
2024 की त्रासदी के जख्म हुए हरे
इस हादसे ने वायनाड के लोगों के दिलों में दो साल पुराने यानी जुलाई 2024 के उस खौफनाक मंजर की यादें ताजा कर दी हैं, जब मुंडक्कई और चूरलमाला में आए भीषण भूस्खलन ने पूरे के पूरे गांवों को नक्शे से मिटा दिया था और 300 से अधिक लोगों की जान चली गई थी। यह नई घटना भी उसी प्रभावित क्षेत्र के काफी करीब हुई है, जिससे स्थानीय लोगों में डर का माहौल है। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर कल्लाडी के पास स्थित रिहायशी कॉलोनियों और होमस्टे से लोगों को निकालकर सुरक्षित राहत शिविरों (Chulikka Government LP School) में शिफ्ट करना शुरू कर दिया है।
क्या है यह टनल प्रोजेक्ट?
जिस जगह यह हादसा हुआ, वह अनाक्कमपोयिल-मेप्पदी ट्विन टनल प्रोजेक्ट है। निर्माण पूरा होने के बाद यह केरल की सबसे लंबी और भारत की तीसरी सबसे लंबी सुरंग सड़क होगी, जो मलप्पुरम और वायनाड जिलों के बीच कनेक्टिविटी को बेहद आसान बना देगी। लेकिन पर्यावरणविदों का हमेशा से मानना रहा है कि पश्चिमी घाट (Western Ghats) के इस बेहद संवेदनशील हिस्से में भारी ब्लास्टिंग और बड़े पैमाने पर खुदाई प्रकृति को भारी नुकसान पहुंचा रही है।
फिलहाल, पूरा ध्यान मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने पर केंद्रित है। डॉक्टरों की विशेष टीमें तैनात हैं और बाहरी राज्यों से आए मजदूरों के बेहतर इलाज के निर्देश दिए गए हैं।

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