George Kurian Resigns: भारतीय राजनीति और मोदी मंत्रिमंडल से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आ रही है। केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य और मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन (George Kurian) ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनका यह कदम 21 जून को राज्यसभा का कार्यकाल समाप्त होने के बाद आया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के केंद्रीय नेतृत्व ने उन्हें इस बार दोबारा राज्यसभा चुनाव के लिए उम्मीदवार नहीं बनाया था, जिसके चलते संवैधानिक नियमों के तहत उन्हें केंद्रीय मंत्रिपरिषद से हटना पड़ा।
राष्ट्रपति भवन से जारी एक आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जॉर्ज कुरियन का इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया है। संविधान के अनुच्छेद 75 के खंड (2) के तहत यह प्रक्रिया पूरी की गई है।
क्यों देना पड़ा जॉर्ज कुरियन को इस्तीफा?
जॉर्ज कुरियन को अगस्त 2024 में मध्य प्रदेश से राज्यसभा सदस्य चुना गया था, जब ज्योतिरादित्य सिंधिया के लोकसभा चुनाव जीतने के बाद वह सीट खाली हुई थी। 2024 में ही उन्हें मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में राज्य मंत्री के रूप में शामिल किया गया था। वह मोदी सरकार में ईसाई समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाले इकलौते मंत्री थे।
चूंकि भारतीय संविधान के नियमों के अनुसार किसी भी व्यक्ति को मंत्री बने रहने के लिए संसद के किसी भी सदन (लोकसभा या राज्यसभा) का सदस्य होना अनिवार्य है, इसलिए 21 जून को कार्यकाल खत्म होने और भाजपा द्वारा दोबारा टिकट न दिए जाने के कारण उनका इस्तीफा तय माना जा रहा था। इस बार मध्य प्रदेश से भाजपा ने राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ और रजनीश अग्रवाल को उच्च सदन के लिए अपना उम्मीदवार बनाया था।
1980 से भाजपा के वफादार रहे हैं कुरियन
65 वर्षीय जॉर्ज कुरियन का राजनीतिक सफर काफी लंबा और संघर्षपूर्ण रहा है। केरल के कोट्टायम के रहने वाले कुरियन पेशे से सुप्रीम कोर्ट के वकील हैं और 1980 में भाजपा की स्थापना के समय से ही पार्टी से जुड़े हुए हैं।
वह भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रह चुके हैं।
उन्होंने राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के उपाध्यक्ष के रूप में भी अपनी सेवाएं दी हैं।
केरल में वह भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष और राज्य महासचिव जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहे हैं।
केरल दौरों के दौरान वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के भाषणों का मलयालम में अनुवाद करने के लिए भी जाने जाते थे।
क्या हैं इसके सियासी मायने?
जॉर्ज कुरियन को साल 2024 में केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल करना केरल में ईसाई समुदाय के बीच भाजपा की पैठ बढ़ाने की एक रणनीतिक कोशिश के तौर पर देखा गया था। वह सीरो-मालाबार कैथोलिक चर्च से आते हैं, जिसका केरल की राजनीति में अच्छा-खासा प्रभाव है।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि हालिया चुनावों में केरल में पार्टी की उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन न होने और स्थानीय समीकरणों में बदलाव के कारण पार्टी ने उन्हें दोबारा राज्यसभा भेजने के बजाय नए चेहरों को मौका देने का फैसला किया। ठीक इसी तरह का वाक्या पहले पूर्व अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी के साथ भी हो चुका है, जिन्हें राज्यसभा टिकट न मिलने पर इस्तीफा देना पड़ा था।
जॉर्ज कुरियन के इस्तीफे के बाद अब केरल भाजपा के अन्य वरिष्ठ नेताओं और मनोनीत सदस्यों (जैसे सी. सदानंदन मास्टर) को केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह मिलने की अटकलें तेज हो गई हैं।

ये भी पढ़े– Lucknow Fire Accident: लखनऊ में भीषण आग का कहर, 14 लोगों की मौत, जान बचाने को खिड़कियों से कूदे लोग
Actor Pankaj Tripathi Brother Attacked: अभिनेता पंकज त्रिपाठी के भाई विजेंद्र तिवारी पर पैतृक गांव में कुल्हाड़ी से जानलेवा हमला, पटना के PMCH में इलाज जारी
Discover more from Live India News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.




