NEET Paper Leak: देश की सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG (National Eligibility cum Entrance Test) को लेकर केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने एक बहुत बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा किया है। सीबीआई द्वारा दिल्ली की विशेष अदालत (राउज एवेन्यू कोर्ट) में दाखिल की गई अपनी चार्जशीट में यह दावा किया गया है कि नीट पेपर लीक की घटना किसी एक दिन या अचानक हुई सुरक्षा चूक का नतीजा नहीं थी, बल्कि इसे महीनों पहले से योजनाबद्ध तरीके से अंजाम देने की एक अंतरराज्यीय आपराधिक साजिश (Multi-State Criminal Conspiracy) रची गई थी। सबसे गंभीर और हैरान करने वाली बात यह है कि इस पूरी साजिश के तार राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) द्वारा नियुक्त किए गए उन विषय विशेषज्ञों (Subject Experts) से जुड़े हैं, जिन पर परीक्षा की निष्पक्षता और गोपनीयता बनाए रखने की मुख्य जिम्मेदारी थी। सीबीआई की चार्जशीट ने न केवल देश के लाखों छात्रों और उनके अभिभावकों के भरोसे को हिलाकर रख दिया है, बल्कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
CBI की चार्जशीट में 13 आरोपी: NTA के 3 बड़े विशेषज्ञ भी नामजद सीबीआई ने इस बहुचर्चित पेपर लीक केस में अपनी चार्जशीट दायर करते हुए 13 मुख्य आरोपियों को नामजद किया है।
इनमें NTA द्वारा नियुक्त तीन प्रमुख विषय विशेषज्ञ (Subject Experts) शामिल हैं: मनीषा गुरुनाथ मांढरे (Botany Expert) प्रह्लाद विठ्ठलराव कुलकर्णी (Chemistry Expert) मनीषा संजय हवलदार (Physics Expert) चार्जशीट के मुताबिक, इन तीनों विशेषज्ञों ने अपने आधिकारिक पद और गोपनीयता का दुरुपयोग करते हुए परीक्षा से बहुत पहले ही प्रश्नों और उत्तर कुंजी तक अपनी पहुँच बनाई और उसे गैर-कानूनी ढंग से बाहरी नेटवर्क तक पहुँचाया।इसके अलावा चार्जशीट में कोचिंग सेंटर संचालकों, बिचौलियों और दलालों के नाम भी शामिल हैं, जिनमें तेजस हर्षदकुमार शाह (डॉ. अभंग प्रभु मेडिकल एकेडमी, पुणे के COO), शिवराज मोतेगांवकर (रेणुकाई करियर सेंटर), डॉ. मनोज भगवानराव शिरुरे, मनीषा संजय वाघमारे, धनंजय लोखंडे, शुभम मधुकर खैरनार, यश यादव, मांगीलाल बीवाल, दिनेश बीवाल और विकास बीवाल शामिल हैं। महीनों पहले कैसे तैयार हुआ साजिश का नेटवर्क? सीबीआई की तफ्तीश में सामने आया है कि कोचिंग संचालकों और दलालों का यह गिरोह परीक्षा से कई महीने पहले से ही सक्रिय था।
जांच अधिकारियों के अनुसार: एक्सपर्ट्स से संपर्क: प्राइवेट कोचिंग संचालकों और दलालों ने NTA के विषय विशेषज्ञों से महीनों पहले ही संपर्क साध लिया था। उनके साथ बैठकों का दौर चला और भारी-भरकम रकम का लेन-देन तय हुआ। विशेष कोचिंग और प्रश्न पत्र डिक्टेट करना: जांच में यह भी सामने आया कि पुणे और लातूर जैसे इलाकों में आरोपी विशेषज्ञों की मदद से चुनिंदा छात्रों के लिए गुप्त कोचिंग कक्षाएं आयोजित की गईं। इनमें रसायन विज्ञान और जीव विज्ञान के वही सवाल और विकल्प डिक्टेट कराए गए, जो परीक्षा के मूल प्रश्न पत्र में आए थे। मल्टी-लेयर सप्लाई चेन: लीक हुआ प्रश्न पत्र सीधे छात्रों तक नहीं पहुँचा, बल्कि इसे कई परतों (Layers) में बिचौलियों के ज़रिए आगे बढ़ाया गया, ताकि मुख्य सूत्रधारों तक पहुँचना मुश्किल हो सके।
डिजिटल नेटवर्क का खेल: Telegram, WhatsApp और PDF फाइल्स सीबीआई ने अपनी चार्जशीट में डिजिटल सबूतों का एक मजबूत पुलिंदा अदालत के सामने पेश किया है। जब केंद्रीय एजेंसी ने आरोपियों के मोबाइल फोन, पेन ड्राइव और अन्य डिजिटल उपकरणों को जब्त कर फोरेंसिक जांच के लिए भेजा, तो कई चौंकाने वाली बातें सामने आईं
‘NEET 2026’ नाम का वॉट्सऐप ग्रुप: आरोपी मनीषा संजय वाघमारे के फोन से एक वॉट्सऐप ग्रुप मिला, जिसका नाम “NEET 2026” रखा गया था। इस ग्रुप का इस्तेमाल साजिशकर्ताओं के बीच गोपनीय तालमेल बैठाने के लिए किया जा रहा था। टेलीग्राम पर PDF और इमेज फाइल्स का आदान-प्रदान: परीक्षा से कई दिन पहले ही लीक प्रश्न पत्रों के PDF और फोटो Telegram तथा WhatsApp पर साझा किए जा चुके थे।
25 लाख में प्रश्न पत्र का सौदा: सीबीआई के अनुसार, नासिक के आरोपी शुभम खैरनार ने धनंजय लोखंडे से प्रश्न पत्र प्राप्त करने के लिए ₹25 लाख का भुगतान किया था। इसके बाद यह सामग्री यश यादव और मांगीलाल बीवाल जैसे बिचौलियों के जरिए आगे सर्कुलेट की गई। सुरक्षा के तौर पर ली जाती थीं ओरिजिनल मार्कशीट और ब्लैंक चेक सीबीआई की जांच में एक और अनोखा व खतरनाक पहलू सामने आया है। दलाल और बिचौलिए छात्रों या उनके अभिभावकों से लीक प्रश्न पत्र देने के बदले न केवल लाखों रुपये वसूल रहे थे, बल्कि अपनी रकम की गांरटी के लिए उनके 10वीं और 12वीं के मूल शैक्षणिक प्रमाण पत्र (Original Certificates) और हस्ताक्षरित खाली चेक (Signed Blank Cheques) भी ज़ब्त कर लेते थे।जब अभ्यर्थी परीक्षा दे देते और बकाया रकम का भुगतान कर देते, तब जाकर उन्हें उनके शैक्षणिक दस्तावेज वापस किए जाते थे। सीबीआई ने कई आरोपियों के पास से ये मूल शैक्षणिक दस्तावेज और चेक बरामद किए हैं, जो इस अवैध व्यापार के मजबूत कानूनी सबूत बने हैं। NTA की कार्यप्रणाली और सुरक्षा चक्र पर गंभीर सवालइस पूरे घटनाक्रम ने National Testing Agency (NTA) के आंतरिक सुरक्षा तंत्र पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। देश की सबसे बड़ी परीक्षाओं को पारदर्शी ढंग से कराने की ज़िम्मेदारी जिस एजेंसी पर है, उसके अपने ही एक्सपर्ट्स इतने बड़े पैमाने पर पैसे के लालच में साजिश का हिस्सा बन गए।
अनुवाद प्रक्रिया की खामियां: केमिस्ट्री एक्सपर्ट प्रह्लाद कुलकर्णी NTA के लिए मराठी से अंग्रेजी बैक-ट्रांसलेशन (Back Translation) का काम देख रहे थे। इस दौरान गोपनीय प्रश्न पत्रों तक उनकी सीधी पहुँच थी, जिसका उन्होंने गलत फायदा उठाया।
बैकग्राउंड वेरिफिकेशन की कमी: NTA में विषय विशेषज्ञों के चयन और उनके बैकग्राउंड चेक (Background Verification) की प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर कैसे कोई कोचिंग संचालक किसी सरकारी परीक्षा के गोपनीय एक्सपर्ट तक इतनी आसानी से पहुँच बना सका? किन धाराओं में दर्ज हुआ है केस?
सीबीआई ने सभी 13 आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।
चार्जशीट में मुख्य रूप से शामिल धाराएं हैं: भारतीय न्याय संहिता (BNS): आपराधिक षड्यंत्र (Criminal Conspiracy), धोखाधड़ी (Cheating) और साक्ष्यों को नष्ट करने (Destruction of Evidence) की धाराएं। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act): लोक सेवकों/विशेषज्ञों द्वारा पद का दुरुपयोग और रिश्वतखोरी। लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 [Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Act, 2024]: परीक्षाओं में धांधली और पेपर लीक रोकने के लिए बनाए गए सख्त नए कानून के तहत प्रावधान। फिलहाल सभी 13 आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं और सीबीआई इस मामले में आगे की कड़ियों को भी खंगाल रही है।
निष्कर्ष- NEET-UG पेपर लीक मामले में सीबीआई का यह खुलासा उन लाखों ईमानदार और मेहनती विद्यार्थियों के लिए किसी सदमे से कम नहीं है, जो दिन-रात एक करके मेडिकल में प्रवेश का सपना देखते हैं। इस खुलासे से स्पष्ट हो गया है कि जब तक परीक्षा एजेंसियों के भीतर जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित नहीं की जाएगी, तब तक कोचिंग माफिया और भ्रष्ट अधिकारियों की साठगांठ को तोड़ना कठिन होगा। अब देखना यह होगा कि अदालत इस मामले में दोषियों को कितनी सख्त सजा सुनाती है और सरकार भविष्य के लिए NTA के ढांचे में क्या बड़े प्रशासनिक बदलाव करती है।

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