Sonam Wangchuk Protest: दिल्ली के जंतर-मंतर पर परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और NEET पेपर लीक मामले को लेकर चल रहा विरोध प्रदर्शन अब एक बेहद संवेदनशील मोड़ पर पहुंच चुका है। प्रख्यात शिक्षाविद और पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक पिछले 18 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं और आज उनके इस अनशन का 19वां दिन है। इस दौरान उनकी सेहत लगातार गिरती जा रही है, जिसे देखते हुए दिल्ली हाईकोर्ट में आज एक बेहद अहम जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई होनी है।
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा आयोजित इस विरोध प्रदर्शन
18 दिनों में 8.9 किलो वजन घटा, 24 घंटे निगरानी में वांगचुक कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा आयोजित इस विरोध प्रदर्शन में सोनम वांगचुक 28 जून से लगातार अनशन पर बैठे हैं। मेडिकल बुलेटिन के मुताबिक, पिछले 18 दिनों में उनका वजन लगभग 8.9 किलोग्राम कम हो चुका है। ताजा रिपोर्ट के अनुसार, उनका वजन घटकर 57.15 किलोग्राम पर पहुंच गया है। वह केवल नमक-पानी (Salt Water) का सेवन कर रहे हैं और उन्हें कोई भी अंतःशिरा ड्रिप (IV Fluids) नहीं दी गई है। डॉक्टरों के मुताबिक, उनका शरीर बेहद कमजोर हो चुका है और वह इस समय 24 घंटे मेडिकल सुपरविजन (चिकित्सकीय निगरानी) में हैं।
दिल्ली हाईकोर्ट में क्या है मामला?
दिल्ली हाईकोर्ट में दायर याचिका में कहा गया है कि सोनम वांगचुक का स्वास्थ्य तेजी से बिगड़ रहा है और यदि समय रहते चिकित्सकीय हस्तक्षेप नहीं किया गया तो स्थिति गंभीर हो सकती है।
याचिकाकर्ताओं ने अदालत से अनुरोध किया है कि जरूरत पड़ने पर उन्हें जबरन चिकित्सीय सहायता और आहार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए जाएं। हालांकि, दूसरी ओर कुछ समर्थकों का कहना है कि यह उनका लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण विरोध है और उनकी इच्छा का सम्मान किया जाना चाहिए।
दिल्ली हाईकोर्ट में आज क्या होगा?
जबरन आहार देने की मांगसोनम वांगचुक की गंभीर होती स्थिति को देखते हुए वकील राकेश कुमार सैनी ने दिल्ली हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की है। इस याचिका में अदालत से गुहार लगाई गई है कि वांगचुक को तुरंत किसी सरकारी अस्पताल में शिफ्ट किया जाए। उनकी जान बचाने के लिए डॉक्टरों की देखरेख में उन्हें जबरन आवश्यक पोषक तत्व, विटामिन और लिक्विड डाइट (Force-feeding) दी जाए, भले ही यह उनकी इच्छा के खिलाफ हो।
केंद्र और दिल्ली सरकार को उनकी जान की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए जाएं। मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने इस मामले को ‘बेहद गंभीर और तत्काल’ मानते हुए केंद्र और दिल्ली सरकार से जवाब मांगा था, जिसकी सुनवाई आज (16 जुलाई 2026) को सूचीबद्ध है।
क्यों अनशन पर बैठे हैं सोनम वांगचुक?
लद्दाख के अधिकारों के लिए पहले भी लंबा अनशन कर चुके सोनम वांगचुक इस बार राष्ट्रीय मुद्दे को लेकर दिल्ली में हैं। वह देश की परीक्षा प्रणाली में सुधार, NEET पेपर लीक विवाद और युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर सरकार की जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे हैं। उनके संगठन और प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा है। विपक्ष के कई बड़े नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी जंतर-मंतर जाकर वांगचुक को अपना समर्थन दिया है और उनसे अपना अनशन समाप्त करने की अपील की है ताकि उनकी जान को कोई खतरा न हो। अब देश भर की नजरें दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले पर टिकी हैं कि क्या अदालत किसी नागरिक के अनशन को जबरन समाप्त कराने या इलाज देने का आदेश जारी करती है या नहीं।
देशभर से मिल रहा समर्थन
सोनम वांगचुक के आंदोलन को देशभर के कई सामाजिक कार्यकर्ताओं, पर्यावरणविदों और छात्रों का समर्थन मिल रहा है। सोशल मीडिया पर भी उनके समर्थन में लगातार पोस्ट किए जा रहे हैं।

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