प्रदर्शन…हंगामा और जुलूस, UAE में बांग्लादेशियों को भारी पड़ गई ये गलती; जानिए फिर क्या हुआ

Image Source : AP UAE Bangladeshis Protest (सांकेतिक तस्वीर) दुबई: संयुक्त अरब अमीरात की एक अदालत ने दर्जनों बांग्लादेशियों को अपने देश की सरकार के खिलाफ यहां प्रदर्शन करने पर कारावास की सजा सुनाई है। इनमें से तीन को उम्रकैद की सजा दी गई है। सरकारी मीडिया ने सोमवार को यह खबर दी। यहां की सरकारी समाचार एजेंसी डब्ल्यूएएम की खबर के मुताबिक अबू धाबी की संघीय अपीलीय अदालत ने रविवार को 53 बांग्लादेशियों को 10-10 साल कारावास, एक बांग्लादेशी को 11 साल कारावास और तीन को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने इन बांग्लादेशियों को सजा पूरी होने के बाद देश से निष्कासित करने का भी आदेश दिया है। सड़कों पर निकाला जुलूस डब्ल्यूएएम ने खबर दी, ‘‘अदालत ने उन गवाहों को सुना जिन्होंने पुष्टि की कि आरोपी बांग्लादेश सरकार के फैसले के खिलाफ बड़ी संख्या में एकत्र हुए एवं यूएई की कई सड़कों पर विशाल जुलूस निकाला।’’ यूएई के अधिकारियों ने शनिवार को गिरफ्तार बांग्लादेशियों के खिलाफ जांच करने और उनके मामलों की सुनवाई में तेजी लाने का निर्देश दिया था। यूएई में राजनीतिक दल या मजदूर संघ बनाने पर रोक है और बड़े पैमाने पर कानून अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर बंदिशें लगाता है। यूएई में भी हुए विरोध प्रदर्शन बांग्लादेश सरकार ने 1971 के मुक्तिसंग्राम में मुक्तिवाहिनी के सदस्यों के रिश्तेदारों के लिए सरकारी नौकरियों में 30 प्रतिशत तक आरक्षण का प्रावधान किया था जिसके खिलाफ कई दिनों तक दक्षिणी एशियाई देश में हिंसक विरोध प्रदर्शन के बाद यूएई में भी विरोध प्रदर्शन हुए थे। बांग्लादेश के उच्चतम न्यायालय ने रविवार को आरक्षण की सीमा को घटाकर सात प्रतिशत कर दिया है। उच्चतम न्यायालय के इस फैसले को प्रदर्शनकारियों की आंशिक जीत माना जा रहा है। (एपी) यह भी पढ़ें: US Presidential Election: जानिए किसने बताया कमला हैरिस को मजाक का पात्र, ऐसे की बाइडेन से तुलना इजराइल के एक और फरमान ने गाजा में मचाया कोहराम, अब क्या करने वाली है सेना Latest World News डिस्क्लेमरः यह Live India News की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. Live India News की टीम ने संपादित नहीं किया है Source link

भारत और रूस के संबंधों पर अमेरिका ने फिर दी प्रतिक्रिया, जानिए इस बार क्या कहा

Image Source : FILE AP USA NSA Jake Sullivan वाशिंगटन: भारत और रूस के संबंधों को लेकर अमेरिका ने फिर प्रतिक्रिया दी है। अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) जेक सुलिवन ने कहा है कि इस बात का कोई ठोस प्रमाण नहीं है कि भारत रूस के साथ सैन्य और प्रौद्योगिकी संबंध मजबूत कर रहा है। सुलिवन ने कहा कि चीन के लिए ‘सहयोगी’ बन चुका रूस जरूरी नहीं कि भविष्य में भारत का ‘विश्वसनीय मित्र’ रहे। सुलिवन ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ द्विपक्षीय वार्ता के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हाल की रूस यात्रा के बारे में पूछे गए प्रश्नों पर यह टिप्पणी की। सुलिवन कोलोराडो में ‘एस्पेन सिक्योरिटी फोरम’ में सवालों का जवाब दे रहे थे। ‘नहीं मिले ठोस प्रमाण’ अमेरिका के एनएसए ने कहा, ‘‘सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या हमें इस बात के ठोस प्रमाण मिले हैं कि भारत रूस के साथ अपने सैन्य और प्रौद्योगिकी संबंधों को गहरा कर रहा है? मुझे उस यात्रा में इस बात के ठोस प्रमाण नहीं मिले हैं कि यह संबंध गहरा हो रहा है, मुझे उस क्षेत्र में कोई परिणाम देखने को नहीं मिला।’’ सुलिवन से पूछा गया कि ‘‘आप उस समय क्या चिंतित थे जब प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति पुतिन से मुलाकात की, जबकि यह मुलाकात उसी समय हुई थी जब राष्ट्रपति जो बाइडेन वाशिंगटन में नाटो के नेताओं की मेजबानी कर रहे थे?’’ ‘भारत का रूस के साथ है ऐतिहासिक संबंध’ पुतिन और मोदी के गर्मजोशी से एक दूसरे को गले लगाने के बारे में पूछे जाने पर सुलिवन ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री मोदी का विश्व नेताओं का अभिवादन करने का एक खास तरीका है। मैंने इसे करीब से और व्यक्तिगत रूप से देखा है।’’ उन्होंने यह भी कहा कि जो बाइडेन प्रशासन कभी नहीं चाहता कि अमेरिका जिन देशों की परवाह करता है, जो उसके साझेदार और मित्र हैं, वे मॉस्को जाकर पुतिन को गले लगाएं। सुलिवन ने कहा, ‘‘लेकिन भारत के साथ हमारे संबंधों के संदर्भ में, आप जानते हैं, हम प्रौद्योगिकी, अर्थशास्त्र और व्यापक हिंद-प्रशांत क्षेत्र की भू-राजनीति में अपार अवसर देखते हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हम उस रिश्ते को, समानता के आधार पर गहरा करना चाहते हैं। हम जानते हैं कि भारत का रूस के साथ ऐतिहासिक संबंध है जिसे वे खत्म नहीं करने जा रहे हैं।’’ ‘गहरे हो रहे हैं चीन और रूस के संबंध’ सुलिवन ने कहा, ‘‘लेकिन हम भारत के साथ इस संबंध की प्रकृति और विशेषताओं के बारे में गहन बातचीत जारी रखना चाहते हैं तथा यह भी कि क्या यह संबंध आगे बढ़ेगा, क्योंकि रूस चीन के और अधिक निकट होता जा रहा है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘चीन का करीबी साझेदार होने के नाते, यह आवश्यक नहीं है कि भविष्य में किसी आकस्मिक स्थिति या संकट के समय रूस भारत के लिए विश्वसनीय मित्र साबित हो।’’ (भाषा) यह भी पढ़ें: Bangladesh Violence: हिंसा से झुलसा बांग्लादेश, 4,500 से अधिक भारतीय छात्र लौटे देश US Elections: बाइडेन के चुनाव से पीछे हटने पर आया ट्रंप का पहला रिएक्शन, जानें क्या कहा? Latest World News डिस्क्लेमरः यह Live India News की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. Live India News की टीम ने संपादित नहीं किया है Source link

बड़ा खतरा! समंदर, नदियों, झील और तलाब में ऑक्सीजन तेजी से हो रहा है कम

Image Source : FILE पानी में घट रहा ऑक्सीजन का स्तर Earth Water Oxygen Decreasing: हाल के दिनों में धरती पर्यावरण से जुड़े बड़े खतरों से निरंतर जूझ रही है। पृथ्वी के जीवन रक्षा तंत्र पर एक बड़ा खतरा मंडरा रहा है। यह खतरा है समंदर, नदियों, झील और तलाब में घुलनशील ऑक्सीजन का तेजी से कम होना। धरती के पानी में तेजी से कम हो रहे ऑक्सीजन से जल में रहनेवालों जीवों का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है। यह शोध नेचर इकोलॉजी एंड एवॉल्यूशन जर्नल में पब्लिश हुआ है। पर्यावरण का संतुलन भी बिगड़ेगा इस रिसर्च के मुताबिक पानी में ऑक्सीजन की कमी से न केवल जलीय जीव प्रभावित होंगे बल्कि पर्यावरण का संतुलन भी बिगड़ेगा। जलवायु परिवर्तन और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन बढ़ने से हवा और पानी का तापमान औसत से ज्यादा बढ़ रहा है जिससे सतही पानी ऑक्सीजन को संभाल नहीं पा रहा है। पानी में रहने वाले जीवों पर खतरा इसके अलावा जितनी ऑक्सीजन जीव जंतुओं के इस्तेमाल पर खर्च होती है, उतनी पेड़ पौधे वापस नहीं बना पा रहे। इससे जल में रहने वाले जीवों के जीवन पर खतरा मंडरा रहा है। इको सिस्टम बिगड़ जाएगा इस रिसर्च में कहा गया है कि अरबों लोग भोजन और आमदनी के लिए समुद्र और मीठे पानी के स्रोत पर निर्भर हैं। ऐसे में अगर जलीय जीवों का जीवन संकट में पड़ता है तो असंतुलन की स्थिति पैदा हो जाएगी और पूरा इको सिस्टम बिगड़ जाएगा।वैज्ञानिकों की एक टीम का यह प्रस्ताव है कि जलीय डीऑक्सीजनेशन को ग्रहीय सीमों की लिस्ट में जोड़ा जाए। यह वह सीमा है जिसके अंदर मानवता आनेवाली पीढ़ियों के लिए विकसित हो सकती है और इसे पार करने के गंभीर रिजल्ट हो सकते हैं। Latest World News डिस्क्लेमरः यह Live India News की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. Live India News की टीम ने संपादित नहीं किया है Source link

हूती विद्रोहियों पर इजरायल का जवाबी हमला, यमन में कई ठिकानों को बनाया निशाना

Image Source : FILE हूती विद्रोहियों पर इजरायल का जवाबी हमला Israel Attack: हूती विद्रोहियों द्वारा तेल अवीव शहर में किए गए घातक ड्रोन हमले के एक दिन बाद इजराइल ने जवाबी कार्रवाई करते हुए पश्चिमी यमन में विद्रोही समूह के कई ठिकानों पर हमला किया। इजराइली सेना ने यह जानकारी दी। इजराइल-हमास के बीच अक्टूबर से युद्ध शुरू होने के बाद यह इजराइल द्वारा यमन की धरती पर किया गया पहला हमला प्रतीत होता है। इजराइली सेना ने बताया कि हूतियों के गढ़ माने जाने वाले पश्चिमी बंदरगाह शहर हुदयदाह में उसके कई ठिकानों पर हमला किया गया। उसने कहा कि हाल के महीनों में इजराइल पर किए गए सैंकड़ों हमलों के जवाब में यह कार्रवाई की गई है। ईंधन भंडारण और बिजली संयंत्रों को बनाया निशाना हूती विद्रोही समूह के प्रवक्ता मोहम्मद अब्दुलसलाम ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ”यमन पर ‘इजराइली हमला’ किया गया, जिसमें ईंधन भंडारण सुविधाओं और बिजली संयंत्रों को निशाना बनाया गया। अब्दुलसलाम ने कहा कि इजराइल इन हमलों से लोगों की पीड़ा को और बढ़ाना चाहता था। उसने कहा कि साथ ही यमन पर गाजा का समर्थन बंद करने का दबाव बनाने के लिए ये हमला किया गया। अब्दुल्सलाम ने कहा कि ये हमले यमन के लोगों और उसके सशस्त्र बलों को गाजा का समर्थन करने के लिए और अधिक मजबूत बनाएंगे। जवाब में कई घातक हमले किए जाएंगे यमन में सुप्रीम पॉलिटिकल काउंसिल के मोहम्मद अली अल-हूती ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ”इसके जवाब में कई घातक हमले किए जाएंगे।” यमन में हूती विद्रोहियों द्वारा नियंत्रित मीडिया समूह अल-मसीराह टीवी ने बताया कि इजराइल ने बंदरगाह पर तेल और डीजल के भंडारण सुविधाओं और स्थानीय बिजली कंपनियों को निशाना बनाया है, जिसके कारण कई लोगों की मौत हुई है और कई गंभीर रूप से झुलस गए हैं। इसने बताया कि इस हमले से बंदरगाह पर आग लग गई है और विद्युत आपूर्ति ठप हो गई। यमन में स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा कि इजराइली हमले में कई लोग मारे गए और अन्य घायल हुए, लेकिन उन्होंने इस बारे में विस्तृत जानकारी नहीं दी। (इनपुट-भाषा) Latest World News डिस्क्लेमरः यह Live India News की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. Live India News की टीम ने संपादित नहीं किया है Source link

न्यूजीलैंड का पुनः प्रधानमंत्री बनने पर क्रिस्टोफर लुक्सन को PM मोदी ने दी बधाई, भारत के साथ संबंधों पर कही ये बात

Image Source : AP नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री। नई दिल्लीः प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने न्यूजीलैंड के समकक्ष क्रिस्टोफर लुक्सन को दोबारा निर्वाचित होने पर बधाई दी है। पीएम मोदी ने इसके साथ ही भारत-न्यूजीलैंड संबंधों को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता जाहिर की है। दोनों नेताओं ने व्यापार एवं आर्थिक सहयोग, पशुपालन, शिक्षा और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में अपने द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की। प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा आज जारी बयान के मुताबिक, दोनों नेताओं ने कहा कि भारत-न्यूजीलैंड संबंध साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और लोगों के बीच घनिष्ठ संबंधों पर आधारित हैं तथा उन्होंने आने वाले वर्षों में द्विपक्षीय सहयोग को नई ऊंचाई पर ले जाने की दृढ़ प्रतिबद्धता दोहराई। बयान में कहा गया, ‘‘दोनों पक्षों ने व्यापार एवं आर्थिक सहयोग, पशुपालन, फार्मास्यूटिकल्स, शिक्षा, अंतरिक्ष सहित विभिन्न क्षेत्रों में पारस्परिक रूप से लाभकारी द्विपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की।’’ मोदी ने न्यूजीलैंड में भारतीय समुदाय के हितों की देखभाल के लिए लुक्सन को धन्यवाद दिया, जिस पर उन्होंने भारतीय समुदाय की सुरक्षा और कल्याण के लिए निरंतर प्रयासों का आश्वासन दिया। मोदी ने बाद में ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘मैं प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लुक्सन को उनके फोन कॉल और शुभकामनाओं के लिए धन्यवाद देता हूं। मोदी भी लगातार तीसरी बार बने हैं पीएम न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री लुक्सन जहां दूसरी बार चुने गए तो वहीं नरेंद्र मोदी लगातार तीसरी बार भारत के प्रधानमंत्री बने हैं। पीए मोदी ने कहा कि लुक्सन ने भारत-न्यूजीलैंड संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए हमारी दृढ़ प्रतिबद्धता दोहराई, जो साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और लोगों के बीच आपसी संबंधों पर आधारित हैं। न्यूजीलैंड में भारतीय समुदाय की सुरक्षा और कल्याण के लिए उनके प्रयासों की सराहना की।’’ हाल में संपन्न हुए लोकसभा चुनाव में मोदी लगातार तीसरी बार सत्ता में लौटे हैं। (भाषा) यह भी पढ़ें अदन की खाड़ी में यमन के हूतियों ने फिर कर दिया बड़ा हमला, सिंगापुर के ध्वज वाला जहाज हुआ क्षतिग्रस्त सावधान! पोलियो का वायरस फिर से आ गया है वापस, पाकिस्तान में 9 मामले सामने आने से हड़कंप Latest World News डिस्क्लेमरः यह Live India News की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. Live India News की टीम ने संपादित नहीं किया है Source link

राष्ट्रपति रईसी की मौत के बाद भी नहीं थमे तेहरान के कदम, परमाणु बम बनाने के बिलकुल करीब पहुंचा ईरान; अमेरिका ने दी रिपोर्ट

Image Source : AP ईरान के परमाणु तैयारियों की अमेरिका द्वारा ली गई सीक्रेट तस्वीर (फाइल) एस्पेन (अमेरिका): ईरान के राष्ट्रपति और कट्टर अमेरिका विरोधी रहे इब्राहिम रईसी की हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मौत हो जाने के बाद भी तेहरान के कदम न रुके और न ही थके। ईरान परमाणु बम बनाने के अपने गुप्त मिशन को लगातार आगे बढ़ाता रहा। अब डॉ. मसूद पेजेशकियन ईरान के नए राष्ट्रपति हैं। सत्ता बदलने के बावजूद ईरान ने अपने इरादे नहीं बदले और वह अब परमाणु बम बनाने के बिलकुल करीब पहुंच चुका है। अमेरिकी की इस रिपोर्ट ने पूरी दुनिया में सनसनी फैला दी है। अमेरिकी प्रशासन के दो शीर्ष अधिकारियों ने कहा है कि ईरान परमाणु बम हासिल करने के बारे में अधिक बात कर रहा है और उसने परमाणु हथियार बनाने के लिए अहम एक पदार्थ को विकसित करने की दिशा में अप्रैल के बाद से प्रगति की है। वह अपने मिशन के काफी करीब पहुंच चुका है। अप्रैल में इजरायल को निशाना बनाकर किए गए ईरान के हवाई हमलों को इजरायल और उसके सहयोगियों ने विफल कर दिया था। अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन ने कोलोराडो में सुरक्षा संबंधी मुद्दों से जुड़े एक कार्यक्रम के अलग-अलग पैनल में कहा कि ईरान के अपने परमाणु कार्यक्रम का शस्त्रीकरण करने के सभी संकेतों पर अमेरिका करीबी नजर रख रहा है। अमेरिका के साथ परमाणु समझौते से पीछे हट गया था ईरान सुलिवन ने कहा, ‘‘मैंने ईरान का अभी तक ऐसा कोई फैसला नहीं देखा है’’, जिससे इस बात के संकेत मिलें कि उसने अभी वास्तव में एक परमाणु बम बनाने का निर्णय लिया है। सुलिवन ने एस्पेन सुरक्षा फोरम में कहा, ‘‘अगर वे उस रास्ते पर आगे बढ़ना शुरू करते हैं, तो उन्हें अमेरिका की ओर से असल समस्या का सामना करना पड़ेगा।’’ ईरान ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन द्वारा 2015 के समझौते से पीछे हट जाने के बाद अपने परमाणु कार्यक्रम पर फिर से आगे बढ़ना शुरू कर दिया था। इस समझौते के तहत ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर कड़ी निगरानी के बदले उसे प्रतिबंधों से राहत दी गई थी। इस बीच, ब्लिंकन ने भी शुक्रवार को कहा, ‘‘पिछले कुछ हफ्तों और महीनों में हमने देखा है कि ईरान विखंडनीय सामग्री विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।’’ विखंडनीय सामग्री का इस्तेमाल परमाणु बम बनाने में किया जा सकता है। (एपी) Latest World News डिस्क्लेमरः यह Live India News की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. Live India News की टीम ने संपादित नहीं किया है Source link

फलस्तीनी क्षेत्रों में इजराइल की उपस्थिति अवैध, यह खत्म होना चाहिए: ICJ

Image Source : FILE AP International Court of Justice नीदरलैंड्स: संयुक्त राष्ट्र की शीर्ष अदालत ने कहा है कि फलस्तीनी कब्जे वाले क्षेत्रों में इजराइल की उपस्थिति “गैरकानूनी” है। अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (आईसीजे) ने शुक्रवार को जारी अपनी गैर-बाध्यकारी राय में कहा कि इजराइल ने पश्चिमी तट और पूर्वी यरुशलम में कब्जा करने, स्थायी नियंत्रण लगाने और बस्तियां बनाने की नीतियों को लागू करके, वहां कब्जा करने वाली शक्ति के रूप में अपनी स्थिति का दुरुपयोग किया है। उसने कहा कि इस तरह की हरकतें “कब्जे वाले फलस्तीनी क्षेत्र में इजराइल की मौजूदगी को गैरकानूनी” बनाती हैं। संयुक्त राष्ट्र के निकाय ने कहा कि उसकी (इजराइल की) निरंतर मौजूदगी “अवैध” है और इसे “जितनी जल्दी हो सके” समाप्त किया जाना चाहिए। बस्तियां बसाने की नीति अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन संयुक्त राष्ट्र की शीर्ष अदालत ने कहा कि पश्चिमी तट और पूर्वी यरुशलम में इजराइल की बस्तियां बसाने की नीति अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करती है। उसने फलस्तीनी राज्य के लिए मांगी गई भूमि पर इजराइल के 57 वर्षों के कब्जे की वैधता पर एक गैर-बाध्यकारी सलाहकारी राय दी। यह एक ऐसा निर्णय है, जिसका इजराइल की नीतियों की तुलना में अंतरराष्ट्रीय राय पर अधिक प्रभाव पड़ सकता है। अदालत ने इस बात पर भी किया विचार अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के अध्यक्ष नवफ सलाम ने अपनी राय में कहा कि समिति ने पाया है कि “इजराइल द्वारा पश्चिमी तट और यरुशलम में बसने वालों का स्थानांतरण तथा इजराइल द्वारा उनकी उपस्थिति बनाए रखना, चौथी जिनेवा संधि के अनुच्छेद 49 के विपरीत है।” अदालत ने इस बात पर भी “गंभीर चिंता” व्यक्त की कि इजराइल की बस्ती नीति का विस्तार हो रहा है। शुक्रवार की सुनवाई गाजा पर इजराइल के 10 महीने के भीषण सैन्य हमले की पृष्ठभूमि में हुई है। दक्षिणी इजराइल में हमास के हमलों के बाद उसने यह जवाबी कार्रवाई शुरू की थी। एक अलग मामले में, अंतरराष्ट्रीय न्यायालय दक्षिण अफ्रीका के इस दावे पर विचार कर रहा है कि गाजा में इजराइल का अभियान नरसंहार के बराबर है। इस दावे का इजराइल पुरजोर खंडन करता है। यह भी जानें पश्चिम एशिया युद्ध में इजराइल ने 1967 में पश्चिमी तट, पूर्वी यरुशलम और गाजा पट्टी पर कब्जा कर लिया था। फलस्तीनी तीनों क्षेत्रों को एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में चाहते हैं। इजराइल पश्चिमी तट को विवादित क्षेत्र मानता है, जिसका भविष्य बातचीत से तय किया जाना चाहिए। उसने हालांकि अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए वहां बस्तियां बसा दी हैं। उसने पूर्वी यरुशलम पर कब्जा कर लिया है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसके इस कदम को मान्यता प्राप्त नहीं है। उसने 2005 में गाजा से अपनी सेना वापस बुला ली थी, लेकिन 2007 में हमास के सत्ता में आने के बाद भी इसने इस क्षेत्र की नाकेबंदी जारी रखी। अंतरराष्ट्रीय समुदाय आम तौर पर तीनों क्षेत्रों को अधिकृत क्षेत्र मानता है। (एपी) यह भी पढ़ें: पाकिस्तान में कितनी है हिंदुओं की आबादी, घटी या बढ़ी…चौंक जाएंगे आप अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव की रेस से जो बाइडेन हटेंगे या नहीं, साफ हो गया सबकुछ भारत के इस कदम से बदल जाएगी किस्मत, एक झटके में मालदीव को होगा बड़ा फायदा Latest World News डिस्क्लेमरः यह Live India News की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. Live India News की टीम ने संपादित नहीं किया है Source link

इंडियानापोलिस में घटी रोडरेज की रोंगटे खड़े कर देने वाली वारदात, कहा-सुनी में युवक की गोली मार कर हत्या

Image Source : X इंडियानापोलिस में युवक की हत्या। वाशिंगटनः अमेरिका के इंडियानापोलिस में रोडरेज में एक सनसनीखेज वारदात हुई है। इंडियाना प्रांत में घटी रोडरेज की इस बेहद चौंकाने वाली वारदात में बीच सड़क पर एक शख्स ने 29 साल के युवक की गोली मारकर हत्या कर दी। एक्स पर रोंगटे खड़े कर देने वाले एक फुटेज में दिखाया गया है कि इंडियानापोलिस में एक व्यक्ति की सड़क पर हुए झगड़े के बाद निर्मम हत्या कर दी गई। बताया जा रहा है कि यह घटना मंगलवार शाम को हुई जब, 29 वर्षीय गेविन दासौर हाथ में 9 एमएम काला पिस्तोल लिए पिकअप ट्रक की ओर भागते देखा जा सकता था। फुटेज में स्पष्ट रूप से दासौर को हैंडगन पकड़े हुए ट्रक के ड्राइवर को मुक्का मारने का प्रयास करते हुए दिखाया गया है। पिकअप ट्रक का ड्राइवर शुरू में दासौर के मुक्के को रोकने की कोशिश करता है। दासौर फिर हैंडगन को अपने बाएं हाथ में ले लेता है और अपने दाहिने हाथ से ड्राइवर की ओर इशारा करते हुए उसे डांटना जारी रखता है। इसी दौरान अचानक पिकअप ट्रक का ड्राइवर अपनी बंदूक निकालता है और दासौर पर कई गोलियां चला देता है, जिससे वह जमीन पर गिर जाता है। सात सेकेंड का यह वीडियो भी उस व्यक्ति की जीवनलीला के साथ समाप्त हो जाता है। एक शख्स ने सड़क पर हो रही इस अराजकता के बीच अपनी कार में छिपकर घटना का वीडियो बना रहा था। आत्मरक्षा में बरी हो गया हत्यारा हैरानी की बात यह रही कि दासौर की निर्ममता से हत्या करने वाले ड्राइवर को पहले हिरासत में लिया गया। मगर बाद में उसके इस कृत्य को आत्मरक्षा करार देते हुए छोड़ दिया गया। इंडियानापोलिस मेट्रोपॉलिटन पुलिस विभाग (आईएमपीडी) ने बताया कि गोलीबारी की घटना साउथ एमर्सन एवेन्यू और थॉम्पसन रोड के चौराहे के पास रात करीब 8:15 बजे हुई। आईएमपीडी ने कहा कि गोलीबारी और कथित रोड रेज घटना के आसपास की परिस्थितियों की जांच जारी है। दुखद घटना का पूरा विवरण निर्धारित करने के लिए विभाग साक्ष्य और गवाहों के बयान जुटाना जारी रखा है। हालांकि, स्थानीय समाचार आउटलेट डब्ल्यूटीएचआर के अनुसार कई गवाहों ने दावा किया कि दासौर काली होंडा चला रहा था और सफेद चेवी पिकअप ट्रक का चालक था। इन दोनों के बीच टकराव एक रोड रेज की घटना से शुरू हुआ। (इनपुट-एक्स) यह भी पढ़ें अब ओबामा और पेलोसी भी जो बाइडेन की राष्ट्रपति उम्मीदवारी के खिलाफ, कहा-“ट्रम्प को हरा नहीं सकते” सोशल मीडिया पर इटली की पीएम का मजाक उड़ाती थी महिला पत्रकार, अब मेलोनी को देंगी 5000 यूरो जुर्माना Latest World News डिस्क्लेमरः यह Live India News की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. Live India News की टीम ने संपादित नहीं किया है Source link

इन आदिवासियों से अब तक बात नहीं कर पाया आम इंसान, देखें माश्को पीरो जनजाति की दुर्लभ तस्वीरें

Image Source : REUTERS माश्को पीरो आदिवासी पेरू के अमेजन क्षेत्र में ऐसे आदिवासी लोगों को देखा गया है, जिनके साथ अब तक कोई आम इंसान संपर्क नहीं कर पाया। माश्को पीरो आदिवासियों की दुर्लभ तस्वीरें मंगलवार को सर्वाइवल इंटरनेशनल ने शेयर कीं। इन तस्वीरों में दर्जनों लोग नदी के किनारे दिखाई दे रहे हैं। यह जगह उस स्थान के करीब है, जहां लकड़ी काटने वाली कंपनियां काम कर रही हैं। आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा करने वाले स्थानीय समूह फेनामाद ने कहा कि इस जनजाति के लोग अकेले रहना पसंद करते हैं, लेकिन हाल के सप्ताहों में भोजन की तलाश में उन्हें जंगल से बाहर आते देखा गया है। इससे साफ है कि लकड़ी काटने वाली कंपनियों की बढ़ती उपस्थिति की वजह से आदिवासी अपने मूल निवास से दूर जा रहे हैं। सर्वाइवल इंटरनेशनल ने तस्वीरें जारी करते हुए बताया कि माश्को पिरो की तस्वीरें जून के अंत में ब्राजील की सीमा के पास दक्षिण-पूर्वी पेरू के माद्रे डी डिओस क्षेत्र में एक नदी के तट पर ली गई थीं। मानवाधिकार संगठन की निदेशक कैरोलीन पीयर्स ने कहा, “इन अविश्वसनीय तस्वीरों से पता चलता है कि माश्को पीरो एकांतवास में बड़ी संख्या में रहते हैं, जो उस स्थान से कुछ किलोमीटर की दूरी पर है, जहां लकड़हारे अपना काम शुरू करने वाले हैं।” Image Source : REUTERS माश्को पीरो आदिवासी 50 ज्यादा आदिवासी जंगल से बाहर निकले हाल के दिनों में 50 से ज्यादा माश्को पिरो आदिवासी मोंटे साल्वाडो गांव के पास दिखाई दिए थे। इस गांव में मूल रूप से यीन लोग रहते हैं। आदिवासी अधिकारों की रक्षा करने वाले एनजीओ ने बताया कि 17 लोगों का एक और समूह पास के गांव प्यूर्टो नुएवो में दिखाई दिया था। सर्वाइवल इंटरनेशनल के अनुसार, माश्को पीरो माद्रे डी डिओस में दो प्राकृतिक रिजर्वों के बीच स्थित क्षेत्र में रहते हैं। ये आदिवासी कभी-कभार ही दिखाई देते हैं और यिन या किसी अन्य जनजाति के साथ ज्यादा बातचीत नहीं करते हैं। Image Source : REUTERS माश्को पीरो आदिवासी कई कंपनियों के पास लकड़ी काटने का ठेका कई लकड़ी काटने वाली कंपनियों के पास माश्को पीरो के निवास वाले क्षेत्र में लकड़ी के ठेके हैं। सर्वाइवल इंटरनेशनल के अनुसार, कैनालेस ताहुआमानू नामक एक कंपनी ने लकड़ी लेकर जाने वाले अपने ट्रकों के लिए 200 किलोमीटर (120 मील) से अधिक सड़कें बनाई हैं। लीमा में कैनालेस ताहुआमानु के प्रतिनिधि ने इस पर बयान देने से मना कर दिया। इस कंपनी को फॉरेस्ट स्टीवर्डशिप काउंसिल ने प्रमाणित किया है, जिसके अनुसार उसके पास देवदार और महोगनी के पेड़ काटने के लिए माद्रे डी डिओस में 53,000 हेक्टेयर (130,000 एकड़) वन हैं। Image Source : REUTERS माश्को पीरो आदिवासी ब्राजील में देखे गए माश्को पिरो आदिवासी पेरू सरकार ने 28 जून को बताया कि स्थानीय निवासियों ने माद्रे डी डिओस की राजधानी प्यूर्टो माल्डोनाडो शहर से 150 किलोमीटर (93 मील) दूर माश्को पिरो आदिवासियों को लास पिएड्रास नदी पर देखा था। एक्रे राज्य में ब्राजील के कैथोलिक बिशप्स की स्वदेशी मिशनरी परिषद की रोजा पैडिला ने बताया कि माश्को पिरो को सीमा पार ब्राजील में भी देखा गया है। उन्होंने कहा, “वे पेरू की तरफ से लकड़हारों से बचकर भागते हैं। इस मौसम में वे समुद्र तट पर ट्रैकाजा (अमेजन कछुए) के अंडे लेने के लिए आते हैं। तभी हमें रेत पर उनके पैरों के निशान मिलते हैं। वे अपने पीछे बहुत सारे कछुए के खोल छोड़ जाते हैं। वे ऐसे लोग हैं, जो शांत नहीं बैठते, वे बेचैन हैं, वे हमेशा भागते रहते हैं।” (इनपुट- रॉयटर्स) यह भी पढ़ें- केपी ओली के नेपाल के PM बनते ही चीन ने दी भारत को टेंशन, जिनपिंग की इस चाह को है पूरी करने की तैयारी अब विदेशों में भी बजेगा भारतीय जनऔषधि केंद्र की दवाओं का डंका, भारत ने मॉरीशस में खोला पहला सेंटर Latest World News डिस्क्लेमरः यह Live India News की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. Live India News की टीम ने संपादित नहीं किया है Source link

भारतीय नौसेना का INS-तेग बना समुद्र का शहंशाह, ओमान तट पर डूबे 13 भारतीयों में से 8 को खींच लिया जिंदा

Image Source : PTI ओमान तट पर डूबे लोगों को बचाती भारतीय नौसेना। नई दिल्लीः ओमान तट के नजदीक डूबे 13 भारतीयों समेत 16 लोगों को बचाने के मिशन पर निकला भारतीय नौसेना के आइएनएस-तेग ने समुद्र में झंडा गाड़ दिया है। तेजी से चलाए गए रेस्क्यू मिशन में आइएनएस तेग ने 13 भारतीयों में से 8 को जिंदा बचा लिया है। बता दें कि ओमान तट पर एक दिन पहले डूबे कोमोरोस के ध्वज वाले मालवाहक जहाज पर सवार चालक दल के सदस्यों का पता लगाने के लिए संचालित बचाव अभियान में भारत के युद्धपोत आइएनएस तेग को भेजा गया था, जिसने 8 भारतीयों और 1 श्रीलंकाई नागरिक को जिंदा बचा लिया है। भारतीय नौसेना ने बुधवार रात को यह जानकारी दी। नौसेना ने बताया कि जहाज 15 जुलाई को ओमान में रास मदराख से दक्षिण पूर्व में करीब 25 समुद्री मील दूर समुद्र में डूब गया था और ओमान के अधिकारियेां के साथ मिलकर बचाव तथा तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। ओमान के समुद्री सुरक्षा केंद्र (एमएससी) ने कहा कि मालवाहक पोत एमटी फाल्कन प्रेस्टीज पर सवार चालक दल के सदस्यों की संख्या 16 थी जिनमें 13 भारतीय और तीन श्रीलंकाई थे। उसने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि एक सदस्य मृत पाया गया। हालांकि उसकी नागरिकता का अभी तक पता नहीं चला है। उसने कहा कि प्रेस्टीज फाल्कन पर सवार चालक दल के 10 सदस्यों का पता चल गया है जिनमें नौ जीवित मिले हैं और एक सदस्य मृत मिला। 6 सदस्य अभी भी लापता भारतीय नौसेना ने कहा कि उसके युद्धपोत आईएनएस तेग ने बचाव और तलाशी अभियान में सहायता करते हुए आठ भारतीयों और एक श्रीलंकाई नागरिक को बचाया। जबकि एक शव बरामद किया। वहीं 6 लोग अभी भी लापता हैं। सूत्रों ने बताया कि ओमान स्थित भारतीय दूतावास खाड़ी देश के संबंधित अधिकारियों के संपर्क में है। इससे पहले भारत सरकार के सूत्रों ने बताया था कि जहाज एमटी फाल्कन प्रेस्टीज ने 14 जुलाई को रात लगभग 10 बजे ओमान के तट पर आपात संदेश भेजा था। एक सूत्र ने बताया, ‘‘ओमान स्थित हमारा दूतावास ओमान के अधिकारियों के लगातार संपर्क में है। ओमान समुद्री सुरक्षा केंद्र (एमएससी) द्वारा समन्वित नाविकों के लिए खोज और बचाव अभियान जारी है। (भाषा) यह भी पढ़ें चीन के जिगोंग शहर के शॉपिंग मॉल में लगी भीषण आग, 16 लोगों की मौत Latest World News डिस्क्लेमरः यह Live India News की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. Live India News की टीम ने संपादित नहीं किया है Source link

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