Stock Market Update: भारतीय शेयर बाजार (Indian Stock Market) के लिए हफ़्ते का आखिरी कारोबारी दिन यानी शुक्रवार बेहद निराशाजनक रहा। पिछले पांच दिनों से बाजार में जारी रिकॉर्ड तोड़ तेजी पर अचानक ब्रेक लग गया और दलाल स्ट्रीट पर चौतरफा बिकवाली देखने को मिली। दिग्गज आईटी कंपनियों (IT Stocks) के शेयरों में आई भारी गिरावट के चलते निवेशकों के करोड़ों रुपये स्वाहा हो गए।
कारोबार के अंत में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सूचकांक सेंसेक्स (BSE Sensex) 607.08 अंक यानी 0.78% की गिरावट के साथ 76,802.90 पर बंद हुआ। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी (NSE Nifty) भी 154.90 अंक (0.64%) फिसलकर 24,013.10 के स्तर पर बंद हुआ। एक समय तो निफ्टी ने 24,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर को भी नीचे की ओर तोड़ दिया था।
आईटी इंडेक्स में क्यों आया भूचाल?
शुक्रवार की इस बड़ी गिरावट के पीछे सबसे मुख्य विलेन आईटी सेक्टर (IT Sector) रहा। एनएसई का निफ्टी आईटी (Nifty IT) इंडेक्स 3.5% से ज्यादा टूट गया। दरअसल, वैश्विक आईटी दिग्गज एक्सेंचर (Accenture) ने अपने पूरे साल के रेवेन्यू ग्रोथ गाइडेंस में कटौती कर दी है। एक्सेंचर के इस फैसले ने भारतीय आईटी निवेशकों को डरा दिया, क्योंकि इंफोसिस, टीसीएस और विप्रो जैसी भारतीय कंपनियां भी बड़े पैमाने पर उन्हीं वैश्विक क्लाइंट्स पर निर्भर हैं।
बाजार बंद होने पर आईटी सेक्टर के दिग्गजों का हाल कुछ ऐसा था
Infosys: 6.69% की भारी गिरावट
TCS: 3.53% नीचे बंद हुआ
HCL Tech: 2.74% की कमजोरी
Tech Mahindra: 2.45% फिसला
इसके अलावा भारी वजन रखने वाले शेयर जैसे एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) और रिलायंस इंडस्ट्रीज (Reliance Industries) में भी बिकवाली का दबाव दिखा। रिलायंस के शेयर में इसकी 49वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) के दौरान जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ (Jio Platforms IPO) की मंजूरी की खबरों के बावजूद करीब 1.2% की गिरावट दर्ज की गई।
गिरावट के 3 बड़े वैश्विक कारण
विशेषज्ञों के मुताबिक, इस मुनाफावसूली और गिरावट के पीछे केवल आईटी सेक्टर ही नहीं, बल्कि कुछ अन्य वैश्विक और भू-राजनीतिक (Geopolitical) कारण भी जिम्मेदार रहे
यूएस-ईरान शांति वार्ता में देरी:- अमेरिका और ईरान के बीच स्विट्जरलैंड में होने वाली अहम शांति वार्ता अचानक टल गई। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के दौरा रद्द करने से वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता का माहौल बन गया।
मध्य पूर्व में तनाव:- लेबनान और इजरायल के बीच बढ़ते जमीनी और हवाई संघर्ष ने निवेशकों को जोखिम वाले एसेट्स (जैसे शेयर बाजार) से पैसा निकालकर सुरक्षित विकल्पों की ओर जाने पर मजबूर किया।
विदेशी निवेशकों (FIIs) की बिकवाली:- विदेशी संस्थागत निवेशकों द्वारा भारतीय बाजारों से लगातार पैसा निकालना भी घरेलू बाजार के सेंटिमेंट को कमजोर कर रहा है।
विशेषज्ञ की राय:- “पिछले 5 दिनों की शानदार रैली के बाद बाजार में एक करेक्शन आना स्वाभाविक था। भू-राजनीतिक तनाव और एक्सेंचर की कमजोर गाइडेंस ने आग में घी का काम किया, जिससे निवेशकों ने ऊपरी स्तरों पर आक्रामक रूप से प्रॉफिट बुकिंग (मुनाफावसूली) की।”
मिडकैप और स्मॉलकैप ने संभाली कमान
भले ही लार्जकैप शेयरों और बेंचमार्क इंडेक्स में हाहाकार मचा था, लेकिन छोटे और मझोले शेयरों में निवेशकों की दिलचस्पी बनी रही। निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 0.4% और निफ्टी मिडकैप 100 में 0.2% की बढ़त देखी गई। इससे साफ पता चलता है कि बिकवाली मुख्य रूप से चुनिंदा बड़े शेयरों और आईटी सेक्टर तक ही सीमित थी। बाजार में गिरावट के बीच भारती एयरटेल, पावर ग्रिड और एनटीपीसी (NTPC) जैसे शेयर हरे निशान में बंद होने में कामयाब रहे।

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