Stock Market News: भारतीय शेयर बाजार के लिए हफ़्ते का आखिरी कारोबारी दिन यानी शुक्रवार काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा। आज बाजार की शुरुआत तो बढ़त के साथ हुई थी, लेकिन क्लोजिंग बेल बजते-बजते मुनाफावसूली हावी हो गई। BSE का 30 शेयरों वाला प्रमुख इंडेक्स सेंसेक्स (Sensex) 116.66 अंक (0.16%) टूटकर 74,243.34 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 50 अंक (0.21%) की गिरावट के साथ 23,366.70 के स्तर पर आ गया।
हालांकि, इस गिरावट के बीच भी बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर में मजबूती देखी गई, जिसने बाजार को और ज्यादा गिरने से बचा लिया। आइए विस्तार से समझते हैं कि आज के कारोबार में क्या खास रहा और बाजार के गिरने के पीछे कौन से बड़े फैक्टर्स जिम्मेदार थे।
RBI Policy के बाद बाजार में आया था उछाल
आज सुबह भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मौद्रिक नीति समिति (MPC) के फैसलों का एलान किया। उम्मीद के मुताबिक, केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखा और अपना न्यूट्रल स्टैंड (Neutral Stance) बरकरार रखा। इस खबर के आते ही शेयर बाजार में जबरदस्त रौनक देखने को मिली थी।
दुपहर से पहले के सत्र में सेंसेक्स करीब 357 अंक उछलकर 74,717.57 के इंट्राडे हाई पर पहुंच गया था, वहीं निफ्टी ने भी 23,516.35 का ऊपरी स्तर छुआ। लेकिन यह तेजी ज्यादा देर टिक नहीं सकी और ऊपरी स्तरों पर निवेशकों ने मुनाफावसूली (Profit Booking) शुरू कर दी।
बाजार में गिरावट के 4 मुख्य कारण
बाजार के जानकारों के मुताबिक, आज Dalal Street पर मंदी हावी होने के पीछे मुख्य रूप से चार बड़े कारण रहे।
1. IT सेक्टर में भारी बिकवाली (विशेषकर विप्रो)
आज बाजार को नीचे खींचने में सबसे बड़ा हाथ आईटी (IT) सेक्टर का रहा। निफ्टी आईटी इंडेक्स करीब 1% कमजोर हुआ। विप्रो (Wipro) के शेयर में आज 4% से ज्यादा की गिरावट आई, जो निफ्टी का टॉप लूजर रहा। विप्रो के बायबैक रिकॉर्ड डेट के बाद निवेशकों द्वारा की गई बिकवाली का असर पूरे आईटी इंडेक्स पर देखने को मिला।
2. महंगाई और विकास दर (GDP) का नया अनुमान
आरबीआई ने ब्याज दरों में तो कोई बदलाव नहीं किया, लेकिन वित्त वर्ष 2026-27 के लिए रिटेल इन्फ्लेशन (महंगाई दर) का अनुमान 4.6% से बढ़ाकर 5.1% कर दिया है। इसका मुख्य कारण पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी और इनपुट कॉस्ट का बढ़ना है। साथ ही, आरबीआई ने GDP ग्रोथ रेट का अनुमान भी 6.9% से घटाकर 6.6% कर दिया, जिससे निवेशकों का सेंटिमेंट थोड़ा कमजोर हुआ।
3. ग्लोबल मार्केट और भू-राजनीतिक तनाव
वैश्विक मोर्चे पर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते युद्ध के खतरों ने निवेशकों को चिंता में डाल रखा है। हालांकि अमेरिकी बाजार (Wall Street) से अच्छे संकेत थे, लेकिन एशियाई बाजारों (जैसे साउथ कोरिया का कोस्पी और जापान का निक्केई) में भारी गिरावट दर्ज की गई। इस वजह से भारतीय निवेशकों ने भी जोखिम लेने से परहेज किया।
4. विदेशी फंड्स की लगातार निकासी
विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) भारतीय बाजार से लगातार पैसे निकाल रहे हैं। पिछले कारोबारी सत्र में भी एफआईआई ने 4,400 करोड़ रुपये से ज्यादा की इक्विटी बेची थी। इस लगातार हो रही बिकवाली ने घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) के सपोर्ट को भी फीका कर दिया।
सेक्टोरल इंडेक्स का हाल: बैंक निफ्टी चमका
आज के कारोबार में सेक्टोरल स्तर पर मिला-जुला रुख देखने को मिला।
निफ्टी बैंक (Nifty Bank): आरबीआई पॉलिसी के फैसले का सबसे सकारात्मक असर बैंकों पर पड़ा। बैंक निफ्टी करीब 188 अंक (0.35%) चढ़कर 54,496.25 पर बंद हुआ।
निफ्टी आईटी और ऑटो: निफ्टी आईटी (Nifty IT) 1% के करीब और निफ्टी ऑटो (Nifty Auto) 0.48% की गिरावट के साथ बंद हुए।
निफ्टी नेक्स्ट 50: अडाणी ग्रुप के शेयरों में आई तेजी की बदौलत यह इंडेक्स 0.26% की बढ़त के साथ बंद होने में कामयाब रहा।
आज के टॉप गेनर्स और लूजर्स
Top Gainers (बढ़त वाले शेयर)
Bajaj Finance: इसमें 3.30% से ज्यादा की तेजी रही।
Adani Enterprises & Adani Green: अडाणी समूह के शेयरों में आज अच्छी खरीदारी दिखी।
Tech Mahindra & M&M: इन शेयरों ने भी बाजार को सहारा देने का काम किया।
Top Losers (गिरावट वाले शेयर)
Wipro: 4% की गिरावट के साथ सबसे ज्यादा टूटा।
Trent & Tata Steel: इनमें भी मुनाफावसूली देखने को मिली।
Bharti Airtel & Reliance Industries: इन हैवीवेट शेयरों में गिरावट से निफ्टी पर दबाव बढ़ा।
निवेशकों के लिए आगे की राह
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि निफ्टी के लिए अब 23,300 – 23,350 का स्तर एक बेहद महत्वपूर्ण सपोर्ट (Support Level) की तरह काम करेगा। जब तक बाजार इस स्तर के ऊपर बना हुआ है, तब तक घबराने की जरूरत नहीं है। लेकिन अगर निफ्टी 23,300 के नीचे फिसलता है, तो गिरावट और बढ़ सकती है। अगले हफ्ते बाजार की नजर वैश्विक संकेतों और कच्चे तेल (Brent Crude) की कीमतों पर रहेगी, जो फिलहाल 95 डॉलर प्रति बैरल के आसपास ट्रेंड कर रहा है।

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