Stock Market Crash: सेंसेक्स 1092 अंक टूटा, आखिरी आधे घंटे में बाजार में भारी बिकवाली
Stock Market Crash: भारतीय शेयर बाजार के लिए शुक्रवार का दिन बेहद निराशाजनक साबित हुआ। हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन दलाल स्ट्रीट पर रीछ पूरी तरह हावी रहे, जिसके चलते बाजार में एक बड़ा क्रैश देखने को मिला। शुरुआती सत्र में एक सीमित दायरे में कारोबार करने के बाद, आखिरी के 30 मिनट में आई भयंकर बिकवाली ने निवेशकों के होश उड़ा दिए।
इस भारी गिरावट के कारण महज कुछ ही घंटों के भीतर निवेशकों के करीब 6 लाख करोड़ रुपये स्वाहा हो गए। आइए विस्तार से जानते हैं कि इस गिरावट के पीछे की मुख्य वजहें क्या रहीं और कौन से सेक्टर्स सबसे ज्यादा प्रभावित हुए।
बाजार का ताजा हाल, सेंसेक्स और निफ्टी के आंकड़े
शुक्रवार को बाजार बंद होने पर दोनों प्रमुख सूचकांक लाल निशान के गहरे गर्त में समा गए।
BSE Sensex: -1,092.05 अंक (1.44%) की भारी गिरावट के साथ 74,775.74 के स्तर पर बंद हुआ।
NSE Nifty 50: -359.40 अंक (1.50%) टूटकर 23,547.75 के स्तर पर आ गया।
Nifty Bank: 614.65 अंक लुढ़ककर 54,239.20 पर बंद हुआ।
बाजार में चौतरफा बिकवाली का माहौल था, जिसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि निफ्टी 500 के 364 स्टॉक्स लाल निशान में बंद हुए। बाजार की इस अस्थिरता को दर्शाने वाला इंडिया विक्स (India VIX) भी 9.14% उछलकर 16.35 पर पहुंच गया, जो बाजार में बढ़ते डर और उतार-चढ़ाव का संकेत है।
आखिरी आधे घंटे में क्यों मची हाहाकार?
दिनभर बाजार में सुस्ती का माहौल था और निफ्टी एक संकीर्ण दायरे में ट्रेड कर रहा था। लेकिन दोपहर 3:00 बजे के बाद अचानक बिकवाली का ऐसा तूफान आया जिसने बाजार को धराशायी कर दिया। इसकी सबसे बड़ी वजह MSCI (Morgan Stanley Capital International) May 2026 Index Rebalancing थी।
मई महीने की इस रीबैलेंसिंग के कारण पैसिव इंस्टीट्यूशनल फंड्स (Passive Institutional Funds) को अपने पोर्टफोलियो में बड़े बदलाव करने थे। इसके तहत कुछ शेयरों को इंडेक्स में शामिल किया गया और कुछ को बाहर। इस बड़े वॉल्यूम एडजस्टमेंट के चलते आखिरी आधे घंटे में संस्थागत निवेशकों (Institutional Investors) ने आक्रामक तरीके से मुनाफावसूली (Profit Booking) की, जिसने बाजार को सीधा नीचे धकेल दिया।
Share Market Crash के 3 बड़े मुख्य कारण
आखिरी आधे घंटे की तकनीकी बिकवाली के अलावा, कुछ गहरे घरेलू और वैश्विक कारण भी थे जो सुबह से ही निवेशकों को डरा रहे थे।
1. मौसम विभाग (IMD) का कमजोर मानसून पूर्वानुमान
भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए मानसून को लाइफलाइन माना जाता है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने देश के दक्षिण-पश्चिम मानसून के पूर्वानुमान को लॉन्ग पीरियड एवरेज (LPA) के 92% से घटाकर 90% कर दिया है। यह पिछले 11 वर्षों में सबसे कमजोर मानसून का अनुमान है। अल-नीनो (El Niño) के प्रभाव के कारण कम बारिश की आशंका से ग्रामीण इलाकों में मांग घटने और आने वाले महीनों में खाद्य मुद्रास्फीति (Food Inflation) बढ़ने का डर पैदा हो गया है, जिससे निवेशकों का सेंटिमेंट बिगड़ गया।
2. अमेरिका-ईरान शांति समझौते पर अनिश्चितता
वैश्विक मोर्चे पर, अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव को कम करने के लिए एक संघर्ष विराम (Ceasefire) समझौते का मसौदा तैयार होने की खबरें थीं। लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा इस समझौते को अंतिम मंजूरी देने में हो रही देरी और वाशिंगटन से आ रही राजनीतिक अनिश्चितता की खबरों ने ग्लोबल मार्केट में डर का माहौल बना दिया। इसके चलते कच्चे तेल (Brent Crude) की कीमतों में उछाल आया और निवेशकों ने वीकेंड से पहले जोखिम वाले एसेट्स से पैसा निकालना सुरक्षित समझा।
3. विदेशी निवेशकों (FIIs) की लगातार बिकवाली
विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) मई महीने में भारतीय बाजार से लगातार अपना पैसा खींच रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक, FIIs ने मई के 18 सत्रों में से 13 सत्रों में शुद्ध बिकवाली की है। गुरुवार और शुक्रवार को भी सैकड़ों करोड़ रुपये की इस लगातार निकासी ने घरेलू बाजार की तरलता (Liquidity) पर गहरा असर डाला है।
सेक्टर्स का हाल, IT को छोड़ सब हुए लाल
इस क्रैश में आईटी (IT) सेक्टर को छोड़कर बाकी सभी सेक्टर्स में भारी गिरावट देखी गई। टेक महिंद्रा, एचसीएल टेक और विप्रो जैसे आईटी शेयरों ने मामूली बढ़त के साथ बाजार को थोड़ा सहारा देने की कोशिश की।
सबसे ज्यादा मार ऑटो, एनर्जी, मेटल और ऑयल एंड गैस इंडेक्स पर पड़ी। निफ्टी पर पावर ग्रिड (Power Grid), ओएनजीसी (ONGC), मैक्स हेल्थ और आयशर मोटर्स (Eicher Motors) जैसे दिग्गज शेयर टॉप लूजर्स की लिस्ट में शामिल रहे।

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