Stock Market Crash: शेयर बाजार में बड़ी गिरावट, सेंसेक्स 479 अंक टूटा, निफ्टी 118 अंक फिसला।
Stock Market Crash: भारतीय शेयर बाजार (Indian Stock Market) में पिछले दो दिनों से जारी तेजी पर मंगलवार को अचानक ब्रेक लग गया। वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी उछाल के कारण घरेलू निवेशकों में घबराहट देखी गई। भारी बिकवाली के चलते बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख इंडेक्स सेंसेक्स (Sensex) 479.26 अंक टूटकर 76,009.70 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 118 अंक फिसलकर 24,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे 23,913.70 पर आ गया।
बाजार की इस बड़ी गिरावट ने निवेशकों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। आइए विस्तार से समझते हैं कि आखिर आज शेयर बाजार के इस तरह धराशायी होने के पीछे कौन से मुख्य कारण रहे।
बाजार में गिरावट के 3 मुख्य कारण
शेयर बाजार में आज आखिरी एक घंटे में बिकवाली का दबाव सबसे ज्यादा देखा गया। एक्सपर्ट्स के अनुसार, इस अचानक आई गिरावट के पीछे ये तीन बड़े अंतरराष्ट्रीय और घरेलू कारक जिम्मेदार हैं।
1. अमेरिका-ईरान तनाव (US-Iran Geopolitical Tension)
वैश्विक बाजारों में मंदी की सबसे बड़ी वजह मिडिल ईस्ट (Middle East) से आ रही खबरें हैं। अमेरिकी सेना द्वारा दक्षिणी ईरान में किए गए “रक्षात्मक हवाई हमलों” के बाद निवेशकों की भावनाएं आहत हुईं। इस सैन्य कार्रवाई ने दोनों देशों के बीच जल्द युद्धविराम (Ceasefire) होने की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। अमेरिकी विदेश मंत्रालय की ओर से आए बयानों के बाद बाजार में यह डर बैठ गया कि यह विवाद लंबा खिंच सकता है, जिससे ग्लोबल सप्लाई चेन प्रभावित होगी।
2. कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में उछाल
भू-राजनीतिक तनाव का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा। ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) की कीमत इंट्राडे ट्रेड में 3% से ज्यादा उछलकर $99.18 प्रति बैरल के करीब पहुंच गई। भारत अपनी जरूरत का करीब 80-85% कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में क्रूड ऑयल का $100 के करीब पहुंचना भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा झटका है। इससे देश में महंगाई (Inflation) बढ़ने और चालू खाता घाटा (Trade Deficit) चौड़ा होने का खतरा बढ़ जाता है, जिससे शेयर बाजार में कमजोरी आती है।
3. डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की लगातार बिकवाली और वैश्विक अनिश्चितता के कारण भारतीय रुपया (INR) अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 45 पैसे कमजोर होकर 95.68/$ के स्तर पर बंद हुआ। रुपये की इस कमजोरी ने पिछले तीन दिनों से जारी रिकवरी को खत्म कर दिया। जब भी रुपया रिकॉर्ड निचले स्तरों की तरफ जाता है, तो विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय बाजार से मुनाफा निकालना ज्यादा सुरक्षित विकल्प हो जाता है।
सेक्टोरल परफॉर्मेंस: लार्ज-कैप डूबे, पर मिडकैप चमके
आज की गिरावट का सबसे ज्यादा असर लार्ज-कैप (Heavyweight Stocks) जैसे बैंकिंग, आईटी और रियल्टी शेयरों पर देखने को मिला। रिलायंस इंडस्ट्रीज, एचडीएफसी बैंक और आईसीआईसीआई बैंक जैसे बड़े शेयरों में बिकवाली से इंडेक्स नीचे आया।
राहत की बात:- जहां एक तरफ मुख्य सूचकांकों में हाहाकार था, वहीं ब्रॉडर मार्केट (Broader Market) यानी मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों ने इस गिरावट को मात दी। निफ्टी मिडकैप 100 (Nifty Midcap 100) इंडेक्स विपरीत परिस्थितियों के बावजूद 62,365 का नया ऑल-टाइम हाई छूने में कामयाब रहा। इससे साफ है कि रिटेल निवेशक अभी भी चुनिंदा मिडकैप शेयरों में खरीदारी कर रहे हैं।
निवेशकों के लिए एक्सपर्ट की सलाह
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि निफ्टी के लिए अब 23,800 से 23,600 का स्तर एक मजबूत सपोर्ट (Support Level) की तरह काम करेगा। जब तक बाजार में भू-राजनीतिक मोर्चे से कोई सकारात्मक खबर नहीं आती, तब तक उतार-चढ़ाव (Volatility) जारी रह सकती है। रिटेल निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे इस गिरावट में पैनिक होकर अपने अच्छे शेयर्स न बेचें। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह गिरावट क्वालिटी स्टॉक्स को निचले स्तरों पर धीरे-धीरे (SIP मोड में) पोर्टफोलियो में जोड़ने का एक बेहतरीन मौका हो सकती है।

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