Bihar MLC Election 2026: बिहार विधान परिषद की 10 सीटों पर चुनाव, सियासी हलचल तेज।
Bihar MLC Election 2026: बिहार विधान परिषद की 10 सीटों पर चुनाव की बुगाहट, जानिए क्या हैं नए सियासी समीकरण
Bihar Vidhan Parishad Chunav 2026: बिहार की सियासत में एक बार फिर गरमाहट बढ़ गई है। सूबे में बिहार विधान परिषद (Bihar Legislative Council) की 10 सीटों पर होने वाले आगामी चुनावों को लेकर सभी राजनीतिक दलों ने अपनी गोटियां बिछानी शुरू कर दी हैं। निर्वाचन आयोग (Election Commission) द्वारा जल्द ही इन सीटों पर चुनाव की तारीखों का आधिकारिक ऐलान होने की संभावना है।
इस बार का एमएलसी चुनाव (MLC Election) बेहद दिलचस्प होने वाला है, क्योंकि विधानसभा में बदले हुए दलीय समीकरणों के कारण कई बड़े उलटफेर देखने को मिल सकते हैं। आइए समझते हैं कि किन 10 सीटों पर यह मुकाबला होने जा रहा है और किस गठबंधन का पलड़ा भारी है।
क्यों हो रहा है चुनाव? समझें सीटों का गणित
बिहार विधान परिषद की इन 10 सीटों में से 9 सदस्यों का कार्यकाल आगामी 28 जून 2026 को समाप्त हो रहा है। वहीं, एक सीट जनता दल यूनाइटेड (JD-U) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद से खाली पड़ी है।
जिन 10 सीटों पर चुनाव होने जा रहे हैं, उनमें से मौजूदा समय में सबसे ज्यादा सीटें जदयू के पास थीं। वर्तमान दलीय स्थिति के हिसाब से खाली हो रही सीटों का विवरण इस प्रकार है।
जदयू (JD-U):- 05 सीटें (नीतीश कुमार, गुलाम गौस, भीष्म साहनी, कुमुद वर्मा और भगवान सिंह कुशवाहा)
भाजपा (BJP):- 02 सीटें (संजय मयूख और सम्राट चौधरी की खाली हुई सीट)
राजद (RJD):- 02 सीटें (मोहम्मद फारूक और सुनील कुमार सिंह)
कांग्रेस (INC):- 01 सीट (समीर कुमार सिंह)
विधानसभा के आंकड़े: किसके पाले में जाएंगी कितनी सीटें?
विधान परिषद के इन सदस्यों का चुनाव बिहार विधानसभा के विधायकों (MLAs) के जरिए सिंगल ट्रांसफ़रेबल वोटिंग सिस्टम के आधार पर होता है। गणित के हिसाब से इस बार एक एमएलसी सीट जीतने के लिए कम से कम 25 विधायकों के समर्थन की जरूरत होगी।
वर्तमान में 243 सदस्यों वाली बिहार विधानसभा में संख्या बल को देखें तो सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के पास 200 से अधिक विधायकों का मजबूत समर्थन हासिल है। इस भारी बहुमत के दम पर एनडीए गठबंधन कुल 10 सीटों में से 9 सीटों पर आसानी से जीत दर्ज कर सकता है।
दूसरी तरफ, मुख्य विपक्षी पार्टी राष्ट्रीय जनता जनता दल (RJD) के पास विधानसभा में ठीक 25 विधायक हैं। ऐसे में महागठबंधन के खाते में केवल 1 सीट जाती हुई दिख रही है। यही वजह है कि इस बार कांग्रेस और राजद के बीच भी टिकट शेयरिंग को लेकर अंदरूनी खींचतान देखने को मिल सकती है।
इन नए चेहरों की एंट्री पर टिकी हैं सबकी नजरें
राजनीतिक गलियारों में उम्मीदवारों के नामों को लेकर चर्चाएं बेहद तेज हैं। सूत्रों की मानें तो इस बार एनडीए की तरफ से कुछ बेहद हाई-प्रोफाइल और नए नामों को उच्च सदन भेजा जा सकता है:
निशांत कुमार:- कयास लगाए जा रहे हैं कि बिहार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार इस चुनाव के जरिए विधान परिषद में एंट्री ले सकते हैं।
दीपक प्रकाश:- पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश भी इस समय किसी सदन के सदस्य नहीं हैं, ऐसे में एनडीए उन्हें भी अपना उम्मीदवार बना सकता है।
बीजेपी और लोजपा (R) के नए चेहरे:- चिराग पासवान की पार्टी लोजपा (रामविलास) और बीजेपी भी अपने कोटे से नए स्थानीय नेताओं को मौका देने की तैयारी में हैं।
सियासी हलचल:- एनडीए जहां इस चुनाव में क्लीन स्वीप (10-0) का दावा कर रही है, वहीं राजद खेमे का कहना है कि “वक्त आने पर नतीजे चौंकाने वाले होंगे” और उन्हें अन्य दलों के विधायकों का भी आंतरिक समर्थन मिलने की उम्मीद है।
निष्कर्ष- बिहार विधान परिषद की ये 10 सीटें राज्य की भविष्य की राजनीति की दिशा तय करेंगी। जहां एनडीए अपनी पकड़ को और मजबूत करने के इरादे से मैदान में है, वहीं विपक्ष के लिए अपनी साख बचाए रखने की बड़ी चुनौती है। आने वाले कुछ दिन बिहार की राजनीति में उम्मीदवारों के चयन और जोड़-तोड़ के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होने वाले हैं।

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