Stock Market Crash: निवेशकों को झटका, सेंसेक्स 719 अंक गिरा, निफ्टी भी लाल निशान में बंद।

Stock Market Crash: भारतीय शेयर बाजार के लिए हफ्ते का पहला दिन बेहद निराशाजनक रहा। सोमवार को दलाल स्ट्रीट पर चौतरफा बिकवाली का माहौल रहा, जिसके चलते प्रमुख सूचकांकों में भारी गिरावट दर्ज की गई।

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Stock Market Crash: भारतीय शेयर बाजार के लिए हफ्ते का पहला दिन बेहद निराशाजनक रहा। सोमवार को दलाल स्ट्रीट पर चौतरफा बिकवाली का माहौल रहा, जिसके चलते प्रमुख सूचकांकों में भारी गिरावट दर्ज की गई। बाजार खुलते ही बिकवाली का जो दौर शुरू हुआ, वह बंद होने तक जारी रहा। इस गिरावट ने निवेशकों के चेहरे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं।

दिन के अंत में, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स 719.09 अंक (0.97%) की गिरावट के साथ 73,524.26 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी-50 भी 243.70 अंक (1.04%) फिसलकर 23,123 के स्तर पर आकर थमा। दोनों ही सूचकांक पिछले करीब दो महीनों के अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए हैं।

बाजार में गिरावट के 5 बड़े कारण
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इस अचानक आए मार्केट क्रैश के पीछे घरेलू कम और वैश्विक कारण ज्यादा जिम्मेदार रहे। आइए जानते हैं वे कौन से प्रमुख फैक्टर्स हैं जिन्होंने बाजार का मूड बिगाड़ा।

1. पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव 
बाजार में आई इस बड़ी गिरावट का सबसे मुख्य और तात्कालिक कारण पश्चिम एशिया (Middle East) में बढ़ता तनाव है। ईरान और इजरायल के बीच छिड़ी सैन्य जंग और तेज हो गई है। इजरायल द्वारा हवाई हमलों और ईरान की तरफ से जवाबी मिसाइल दागे जाने की खबरों ने ग्लोबल मार्केट में डर का माहौल (Risk-off sentiment) पैदा कर दिया है, जिसका सीधा असर भारतीय बाजार पर पड़ा

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2. कच्चे तेल की कीमतों में उछाल 
तनाव बढ़ते ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छूने लगी हैं। ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) की कीमत 4.3% से ज्यादा उछलकर $97 से $98 प्रति बैरल के करीब पहुंच गई। भारत अपनी जरूरत का 80% से अधिक कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में क्रूड का महंगा होना भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए महंगाई और चालू खाता घाटे (Current Account Deficit) का खतरा बढ़ाता है।

3. ग्लोबल टेक और एआई स्टॉक्स में बिकवाली
अमेरिकी बाजार (Wall Street) में पिछले हफ्ते के अंत में आई गिरावट ने भी माहौल खराब किया। विशेषकर पिछले कई महीनों से दौड़ रहे ‘रेड-हॉट’ टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े शेयरों में बड़ी गिरावट देखने को मिली। इसका असर एशियाई बाजारों पर पड़ा, जहां दक्षिण कोरिया का कोस्पी (KOSPI) 8% और जापान का निक्की (Nikkei) करीब 4% तक टूट गया।

4. FIIs की लगातार बिकवाली
विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) भारतीय बाजार से लगातार अपना पैसा निकाल रहे हैं। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने पिछले हफ्ते ही भारी-भरकम बिकवाली की थी, जो सोमवार को भी जारी रही। वे उभरते बाजारों (Emerging Markets) से पैसा निकालकर सुरक्षित विकल्पों की तरफ शिफ्ट हो रहे हैं।

5. अमेरिकी फेड रेट में कटौती की उम्मीदें कम होना
अमेरिका में आए मजबूत रोजगार आंकड़ों (May Jobs Report) के बाद अब यह आशंका बढ़ गई है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Fed) ब्याज दरों में जल्द कटौती नहीं करेगा। ऊंची ब्याज दरों के लंबे समय तक बने रहने की आशंका से विदेशी निवेशक सतर्क रुख अपना रहे हैं।

सेक्टर का हाल और टॉप लूजर्स-गेनर्स
इस क्रैश में केवल चुनिंदा शेयर ही नहीं, बल्कि पूरा बाजार लाल निशान में डूबा नजर आया। एनएसई के 16 प्रमुख सेक्टर्स में से 15 गिरावट के साथ बंद हुए।

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सबसे ज्यादा पिटने वाले सेक्टर्स: निफ्टी रियल्टी, निफ्टी मेटल, ऑटो और प्राइवेट बैंक इंडेक्स में सबसे ज्यादा कमजोरी देखी गई। टाटा मोटर्स, महिंद्रा एंड महिंद्रा और टाटा स्टील के शेयरों में 2% से ज्यादा की गिरावट रही। ग्लोबल टेक रूट की वजह से निफ्टी आईटी (Nifty IT) भी दबाव में रहा, जिसमें विप्रो जैसे शेयर भारी नुकसान में रहे।

बचाव में उतरा फार्मा सेक्टर:- इस अनिश्चितता के माहौल में निवेशकों ने डिफेंसिव रुख अपनाते हुए फार्मा और हेल्थकेयर सेक्टर में खरीदारी की, जिससे निफ्टी फार्मा इंडेक्स हरे निशान में बंद होने में कामयाब रहा।

टॉप गेनर्स:- गिरावट के बावजूद पावर ग्रिड, भारती एयरटेल और टेक महिंद्रा जैसे कुछ शेयर बढ़त बनाने में सफल रहे।

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निवेशकों के लिए आगे की राह
बाजार के जानकारों का कहना है कि तकनीकी तौर पर निफ्टी अब अपने बेहद महत्वपूर्ण सपोर्ट जोन 23,100 से 23,000 के आसपास आ गया है। अगर बाजार इस स्तर को होल्ड नहीं कर पाता है, तो बिकवाली और बढ़ सकती है। वहीं ऊपर की तरफ 23,300–23,500 अब मजबूत रेजिस्टेंस का काम करेगा। मौजूदा माहौल को देखते हुए रिटेल निवेशकों को जल्दबाजी में बड़ा निवेश करने से बचना चाहिए और बाजार के स्थिर होने का इंतजार करना चाहिए।

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