Stock Market Closing: भारतीय शेयर बाजार में बुधवार, 2 सितंबर 2026 को लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में गिरावट देखने को मिली। वैश्विक बाजारों में कमजोर संकेत, पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई। इसके चलते सेंसेक्स 373.93 अंक यानी 0.49% गिरकर 76,570.35 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 50 में 141.35 अंक यानी 0.59% की गिरावट रही और यह 23,914.45 के स्तर पर बंद हुआ।
- सेंसेक्स-निफ्टी में बड़ी गिरावट
- बाजार गिरने की सबसे बड़ी वजह क्या रही?
- अमेरिकी बॉन्ड यील्ड ने भी बढ़ाई चिंता
- ऑटो और आईटी शेयरों पर दबाव
- तीसरे दिन भी बाजार में गिरावट
- निवेशकों के लिए क्या मायने रखता है?
- आगे बाजार की नजर किन स्तरों पर?
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- Sensex-Nifty Update: सेंसेक्स 539.34 अंक टूटकर 76,933.59 पर बंद, निफ्टी भी 116.90 अंक फिसलकर 24,090.85 पर आया
सेंसेक्स-निफ्टी में बड़ी गिरावट
कारोबार की शुरुआत से ही भारतीय शेयर बाजार पर दबाव देखने को मिला। दिन के दौरान सेंसेक्स एक समय करीब 809 अंक तक टूटकर 76,135.72 के इंट्रा-डे निचले स्तर पर पहुंच गया। निफ्टी भी लगभग 269 अंक गिरकर 23,786.80 तक चला गया। हालांकि बाद में बाजार में कुछ रिकवरी देखने को मिली और प्रमुख इंडेक्स अपने दिन के निचले स्तर से ऊपर आकर बंद हुए।
निफ्टी 50 का 24,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे बंद होना भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण संकेत रहा।
बाजार गिरने की सबसे बड़ी वजह क्या रही?
बाजार में गिरावट के पीछे कई वैश्विक और घरेलू कारण रहे। इनमें सबसे प्रमुख पश्चिम एशिया में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव और इससे कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी रही।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ी है। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश पर दबाव बढ़ने की आशंका रहती है। महंगा क्रूड भारत के आयात बिल और महंगाई के लिहाज से भी चिंता बढ़ा सकता है।
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड ने भी बढ़ाई चिंता
निवेशकों की चिंता बढ़ाने वाला एक और कारण अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी रही। ऊंची बॉन्ड यील्ड के कारण इक्विटी जैसे जोखिम वाले एसेट्स की तुलना में बॉन्ड निवेश अधिक आकर्षक हो सकते हैं।
वैश्विक बाजारों में कमजोरी का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी पड़ा। निवेशकों ने जोखिम कम करने के लिए कई प्रमुख शेयरों में बिकवाली की, जिससे सेंसेक्स और निफ्टी पर दबाव बढ़ गया।
ऑटो और आईटी शेयरों पर दबाव
बुधवार के कारोबार में कई सेक्टर्स में कमजोरी रही। ऑटो सेक्टर सबसे ज्यादा दबाव में रहने वाले क्षेत्रों में शामिल रहा। इसके अलावा आईटी समेत कई अन्य सेक्टर्स में भी बिकवाली देखने को मिली।
प्रमुख शेयरों में एशियन पेंट्स, एचडीएफसी बैंक, महिंद्रा एंड महिंद्रा, एचसीएल टेक्नोलॉजीज, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स और इंफोसिस जैसे शेयरों में कमजोरी रही।
दूसरी ओर, अडानी पोर्ट्स, पावर ग्रिड, एनटीपीसी और रिलायंस इंडस्ट्रीज समेत कुछ शेयरों में खरीदारी देखने को मिली।
तीसरे दिन भी बाजार में गिरावट
बुधवार की गिरावट के साथ भारतीय बाजार में कमजोरी का सिलसिला लगातार तीसरे कारोबारी सत्र तक पहुंच गया। निवेशक वैश्विक घटनाक्रमों और तेल की कीमतों पर नजर बनाए हुए हैं।
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, आने वाले सत्रों में कच्चे तेल की चाल, पश्चिम एशिया की स्थिति और वैश्विक बॉन्ड यील्ड बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
निवेशकों के लिए क्या मायने रखता है?
बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच निवेशकों के लिए वैश्विक घटनाक्रमों पर नजर रखना महत्वपूर्ण हो गया है। खासकर भारत के लिए कच्चे तेल की कीमतें महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी से महंगाई और आयात बिल पर असर पड़ सकता है।
हालांकि, घरेलू अर्थव्यवस्था से जुड़े कुछ सकारात्मक संकेत बाजार को सहारा दे सकते हैं। इसलिए आने वाले दिनों में वैश्विक जोखिमों और घरेलू आर्थिक आंकड़ों के बीच संतुलन बाजार की दिशा के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।
आगे बाजार की नजर किन स्तरों पर?
निफ्टी के 24,000 से नीचे बंद होने के बाद अब यह स्तर बाजार के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बाजार में कमजोरी जारी रहने पर निचले स्तरों पर अगला सपोर्ट देखने को मिल सकता है।
वहीं, अगर बाजार में खरीदारी लौटती है तो 24,000 के ऊपर टिकना निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत हो सकता है। फिलहाल वैश्विक संकेतों के कारण बाजार में अस्थिरता बनी रहने की संभावना है।
नोट- Stock Market Closing में बुधवार को सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स 373.93 अंक गिरकर 76,570.35 पर और निफ्टी 141.35 अंक टूटकर 23,914.45 पर बंद हुआ।
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और ऊंची बॉन्ड यील्ड ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया। अब बाजार की नजर वैश्विक घटनाक्रमों और क्रूड ऑयल की कीमतों पर रहेगी।

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