मकर संक्रांति की शुभकामनाएं 2026: सूर्य का उत्तरायण, नई ऊर्जा और उमंग का महापर्व मकर संक्रांति।
मकर संक्रांति: आस्था और उत्साह का महापर्व भारतीय संस्कृति में मकर संक्रांति का पर्व प्रकृति और ऋतु परिवर्तन का प्रतीक भी है। हिंदू पंचांग में सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करते समय मकर संक्रांति कहलाता है। यह दिन है जब सूर्यदेव उत्तरायण होते हैं, जिससे दिन लंबे होते हैं और रातें छोटी होती हैं।
उत्तर भारत में इसे ‘खिचड़ी’ और ‘मकर संक्रांति’ कहते
यह त्योहार पूरे भारत में अलग-अलग नामों से मनाया जाता है। उत्तर भारत में इसे ‘खिचड़ी’ और ‘मकर संक्रांति’ कहते हैं, पंजाब में ‘लोहड़ी’, दक्षिण भारत में ‘पोंगल’ और असम में ‘बिहू’ के रूप में इसकी रौनक देखते ही बनती है। नाम अलग हैं, लेकिन दान-पुण्य और खुशियां बांटने का भाव एक ही है।
परंपराएं और पकवान
पवित्र स्नान और दान: इस दिन गंगा, यमुना और अन्य पवित्र नदियों में स्नान करने का विशेष महत्व है। लोग चावल, दाल, गुड़ और तिल का दान कर पुण्य कमाते हैं।
तिल-गुड़ का महत्व: सर्दियों के मौसम में तिल और गुड़ का सेवन स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है। “तिल-गुड़ घ्या, गोड-गोड बोला” की गूंज के साथ लोग एक-दूसरे को मिठास बांटते हैं।
पतंगबाजी: आसमान में रंग-बिरंगी पतंगें इस बात का प्रतीक हैं कि हमें भी ऊंचाइयों को छूना चाहिए। यह स्वास्थ्य के लिए भी अच्छा है क्योंकि पतंग उड़ाते समय शरीर को धूप (विटामिन-D) मिलती है।

मकर संक्रांति हमें सिखाती है कि जैसे सूर्य अंधकार को मिटाकर नई रोशनी फैलाता है, वैसे ही हमें भी अपने जीवन से नकारात्मकता को त्याग कर प्रेम और भाईचारे को अपनाना चाहिए।
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