Gadar Celebrates 25 Years: भारतीय सिनेमा के इतिहास में कुछ फिल्में ऐसी होती हैं जो सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर कमाई नहीं करतीं, बल्कि लोगों के दिलों में एक कल्ट स्टेटस हासिल कर लेती हैं। साल 2001 में रिलीज हुई निर्देशक अनिल शर्मा की फिल्म ‘गदर: एक प्रेम कथा’ (Gadar: Ek Prem Katha) एक ऐसी ही ऐतिहासिक फिल्म है, जिसने आज अपने रिलीज के शानदार 25 साल पूरे कर लिए हैं।
जब यह फिल्म सिनेमाघरों में आई थी, तब देश का माहौल देशभक्ति और जज्बात से भर गया था। सनी देओल (Sunny Deol) का वो दमदार अंदाज, अमीषा पटेल (Ameesha Patel) की मासूमियत और अमरीश पुरी (Amrish Puri) की खूंखार अदाकारी ने एक ऐसा जादू बिखेरा, जिसकी गूंज आज 25 साल बाद भी थमी नहीं है। आइए इस खास मौके पर जानते हैं कि आखिर क्यों ‘गदर’ आज भी भारतीय सिनेमा की सबसे बड़ी फिल्मों में से एक मानी जाती है।
जब सिनेमाघरों के बाहर लगी थीं मील लंबी कतारें
आज के दौर में भले ही फिल्में 100 या 500 करोड़ का बिजनेस आसानी से कर लेती हैं, लेकिन 25 साल पहले ‘गदर’ ने जो इतिहास रचा था, उसकी मिसाल मिलना मुश्किल है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो उस वक्त लोग ट्रकों और ट्रैक्टरों में भरकर सिनेमाहॉल पहुंचे थे। पंजाब और उत्तर भारत के कई शहरों में सुबह 6 बजे से ही शो शुरू करने पड़े थे, जो बॉलीवुड के इतिहास में पहली बार हुआ था। तारा सिंह और सकीना की इस प्रेम कहानी को देखने के लिए लोगों में एक अलग ही दीवानगी थी।
वो आइकॉनिक हैंडपंप सीन और ‘हिंदुस्तान जिंदाबाद’ का नारा
‘गदर’ का जिक्र आते ही जो सबसे पहला सीन दिमाग में आता है, वह है सनी देओल का पाकिस्तान में जाकर हैंडपंप उखाड़ना। यह सिर्फ एक एक्शन सीन नहीं था, बल्कि सिनेमाघरों में बैठे दर्शकों के लिए एक इमोशन था। जब सनी देओल भरे मजमे में अमरीश पुरी (अशरफ अली) के सामने खड़े होकर पूरे जोश के साथ चिल्लाते हैं—”हिंदुस्तान जिंदाबाद था, जिंदाबाद है और जिंदाबाद रहेगा!”—तो आज भी दर्शकों के रोंगटे खड़े हो जाते हैं। इस सीन के दौरान थिएटर्स में तालियों और सीटियों की जो गूंज उठी थी, वो आज भी सिनेमा प्रेमियों को याद है।
अमरीश पुरी की दमदार अदाकारी और सदाबहार संगीत
फिल्म की सफलता में जितना हाथ सनी देओल की दहाड़ का था, उतना ही योगदान दिवंगत अभिनेता अमरीश पुरी का भी था। उन्होंने ‘अशरफ अली’ के किरदार को इस कदर जीवंत किया कि दर्शक उनसे नफरत करने पर मजबूर हो गए। वहीं, उत्तम सिंह द्वारा तैयार किया गया फिल्म का संगीत आज भी उतना ही फ्रेश लगता है। ‘उड़ जा काले कावां’ और ‘मुसाफिर जाने वाले’ जैसे गाने आज भी लोगों की प्लेलिस्ट का हिस्सा हैं।
25 साल बाद भी क्यों प्रासंगिक है ‘गदर’?
‘गदर’ सिर्फ भारत-पाकिस्तान के विभाजन की पृष्ठभूमि पर बनी एक फिल्म नहीं है, बल्कि यह एक आम इंसान के अपने परिवार और प्यार के लिए किसी भी हद तक गुजर जाने की कहानी है। एक पति का अपनी पत्नी को वापस लाने का संघर्ष और एक पिता का अपने बच्चे के लिए पूरी दुनिया से लड़ जाना, इसी मानवीय भावना (Human Emotion) ने इस फिल्म को अमर बना दिया।
यही वजह है कि 25 साल बीत जाने के बाद भी, जब भी टीवी पर ‘गदर’ आती है, लोग अपनी जगह से हिल नहीं पाते। तारा सिंह का वो एंग्री यंग मैन वाला अवतार और उनका निश्छल प्यार हमेशा भारतीय सिनेमा के सुनहरे अक्षरों में दर्ज रहेगा।

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