Punjab Municipal Election Results 2026: पंजाब में फिर चला AAP का जादू, कांग्रेस-BJP पीछे
Punjab Municipal Election Results 2026: पंजाब नगर निगम और स्थानीय निकाय चुनाव 2026 के नतीजों ने एक बार फिर राज्य की सियासत में आम आदमी पार्टी (AAP) का लोहा मनवा दिया है। 29 मई 2026 को हुई वोटों की गिनती में मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में ‘झाड़ू’ का जादू सिर चढ़कर बोला। विपक्षी दल— कांग्रेस, शिरोमणि अकाली दल (SAD) और भारतीय जनता पार्टी (BJP)— इस चुनावी दौड़ में काफी पीछे छूट गए हैं।
इन नतीजों को 2027 में होने वाले पंजाब विधानसभा चुनाव का ‘सेमीफाइनल’ माना जा रहा था। इस लिहाज से AAP ने मैदान मारकर विपक्षियों के हौसले पस्त कर दिए हैं।
मुख्य आंकड़े और पार्टी-वार स्थिति (Punjab Election Result Tally)
पंजाब राज्य चुनाव आयोग के शुरुआती रुझानों और नतीजों के अनुसार, आम आदमी पार्टी ने शहरी स्थानीय निकायों में एकतरफा बढ़त बनाई है।
| राजनीतिक दल | जीती/बढ़त वाली सीटें (वार्ड) |
| आम आदमी पार्टी (AAP) | 574 |
| इंडियन नेशनल कांग्रेस (INC) | 201 |
| शिरोमणि अकाली दल (SAD) | 136 |
| भारतीय जनता पार्टी (BJP) | 52 |
नोट: आंकड़े दोपहर तक के रुझानों और घोषित नतीजों पर आधारित हैं।
बड़े शहरों में AAP का क्लीन स्वीप
इस चुनाव में पंजाब के 8 प्रमुख नगर निगमों (Mohali, Bathinda, Abohar, Barnala, Kapurthala, Moga, Batala, Pathankot) सहित 75 नगर परिषदों और 19 नगर पंचायतों के लिए वोट डाले गए थे।
मोहाली और लुधियाना में दबदबा: मोहाली नगर निगम और लुधियाना के वार्डों में आम आदमी पार्टी ने बंपर जीत दर्ज की है। मोहाली में AAP ने शुरुआती चरण से ही विपक्ष को संभलने का मौका नहीं दिया।
बठिंडा में भी ‘झाड़ू’ की गूंज: बठिंडा नगर पालिका में भी AAP के उम्मीदवारों ने भारी अंतर से जीत दर्ज की है। मतदान से पहले ही राज्य में लगभग 80 उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए थे, जिनमें सबसे ज्यादा संख्या (63) AAP की थी।
विपक्ष का प्रदर्शन: जहां कांग्रेस ने कपूरथला और होशियारपुर के टांडा उड़मुड़ में कुछ हद तक अपनी साख बचाई है, वहीं अकाली दल समराला जैसी कुछ छोटी परिषदों में दूसरे नंबर पर रहा। इस शहरी चुनाव में बीजेपी (BJP) का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा है और वह दहाई का आंकड़ा छूने के लिए भी संघर्ष करती दिखी।
मतदाताओं ने क्यों जताया भगवंत मान सरकार पर भरोसा?
शहरी मतदाताओं का रुझान स्पष्ट रूप से सत्ताधारी पार्टी के पक्ष में गया है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इसके पीछे तीन मुख्य कारण हैं:
मुफ्त बिजली और बुनियादी विकास: पंजाब सरकार द्वारा घरेलू उपभोक्ताओं को दी जा रही 300 यूनिट मुफ्त बिजली और मोहल्ला क्लीनिक जैसी योजनाओं का शहरी मध्यमवर्ग पर सीधा असर पड़ा है।
स्थानीय मुद्दों पर पकड़: AAP ने अपना पूरा कैंपेन साफ-सफाई, सड़कों के सुधारीकरण और स्ट्रीट लाइट जैसे बुनियादी इंफ्रास्ट्रक्चर पर केंद्रित रखा।
मजबूत संगठन: विपक्ष की तुलना में आम आदमी पार्टी का ग्राउंड नेटवर्क इस समय काफी आक्रामक और सक्रिय मोड में है।
2027 के विधानसभा चुनाव पर क्या होगा असर?
पंजाब में कुल 63.94% मतदान दर्ज किया गया था, जो 2021 के मुकाबले करीब 9.5% कम था। इसके बावजूद, यह नतीजे साफ संकेत देते हैं कि पंजाब की जनता फिलहाल भगवंत मान के कामकाज से संतुष्ट है।
कांग्रेस के लिए यह नतीजे एक बड़ा झटका हैं क्योंकि 2021 के निकाय चुनावों में कांग्रेस ने एकतरफा जीत हासिल की थी, लेकिन इस बार वह पूरी तरह पिछड़ गई। वहीं, अकाली दल और बीजेपी के लिए अपनी खोई हुई सियासी जमीन वापस पाना अब और भी चुनौतीपूर्ण हो गया है। इन नतीजों ने 2027 की चुनावी जंग के लिए आम आदमी पार्टी का रास्ता काफी हद तक साफ कर दिया है।

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