Ganesh Chaturthi 2026: गणपति बप्पा के भक्तों के लिए इंतजार की घड़ियां अब खत्म होने वाली हैं। देशभर में गणेश चतुर्थी की तैयारियां जोर-शोर से शुरू हो गई हैं। घरों से लेकर बड़े-बड़े पंडालों तक भगवान गणेश के स्वागत की तैयारी की जा रही है। इस साल गणेश चतुर्थी 14 सितंबर 2026, सोमवार को मनाई जाएगी। इसके साथ ही 10 दिवसीय गणेशोत्सव की शुरुआत होगी।
- कब है Ganesh Chaturthi 2026?
- गणपति स्थापना का शुभ मुहूर्त
- घर में गणपति स्थापना कैसे करें?
- गणपति पूजा में क्या चढ़ाएं?
- गणेश चतुर्थी पर व्रत का महत्व
- गणेश चतुर्थी पर चंद्रमा देखने से क्यों बचते हैं?
- कब होगा Ganesh Visarjan 2026?
- विसर्जन के दौरान रखें इन बातों का ध्यान
- देशभर में दिखेगा गणपति उत्सव का उत्साह
- गणपति बप्पा के स्वागत की तैयारी
- गणेश चतुर्थी का धार्मिक महत्व
- गणपति बप्पा मोरया! मंगलमूर्ति मोरया!
- Krishna Janmashtami 2026: भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव की तैयारियां शुरू, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त और व्रत विधि
गणेश चतुर्थी को भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। हिंदू धर्म में भगवान गणेश को प्रथम पूज्य माना गया है। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत से पहले गणपति की पूजा करने की परंपरा है। मान्यता है कि गणेश जी की पूजा करने से जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।
कब है Ganesh Chaturthi 2026?
पंचांग के अनुसार, गणेश चतुर्थी 14 सितंबर 2026, सोमवार को मनाई जाएगी। चतुर्थी तिथि 14 सितंबर को सुबह 7:06 बजे शुरू होगी और 15 सितंबर को सुबह 7:44 बजे समाप्त होगी।
इस दिन भक्त अपने घरों और सार्वजनिक पंडालों में भगवान गणेश की मूर्ति स्थापित करते हैं। स्थापना के बाद विधि-विधान से पूजा, आरती और प्रसाद का आयोजन किया जाता है।
गणपति स्थापना का शुभ मुहूर्त
गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश की पूजा के लिए मध्यान्ह का समय विशेष शुभ माना जाता है। अलग-अलग शहरों में स्थानीय पंचांग के अनुसार मुहूर्त में थोड़ा अंतर हो सकता है।
नई दिल्ली में गणेश पूजा का मध्यान्ह मुहूर्त
सुबह 11:02 बजे से दोपहर 1:31 बजे तक।
वहीं मुंबई में यह समय 11:20 बजे से 1:48 बजे तक और बेंगलुरु में 11:02 बजे से 1:28 बजे तक बताया गया है। इसलिए पूजा करते समय अपने शहर के स्थानीय पंचांग के अनुसार समय देखना बेहतर रहेगा।
घर में गणपति स्थापना कैसे करें?
गणपति बप्पा की स्थापना से पहले घर की अच्छी तरह सफाई करें। पूजा के लिए घर के साफ और पवित्र स्थान का चयन करें। वहां चौकी रखकर उस पर साफ कपड़ा बिछाएं।
इसके बाद भगवान गणेश की मूर्ति को चौकी पर स्थापित करें। मूर्ति के नीचे चावल या अक्षत रखना शुभ माना जाता है। भगवान गणेश को लाल या पीले वस्त्र अर्पित किए जा सकते हैं।
स्थापना के बाद भगवान गणेश का ध्यान करें और पूजा का संकल्प लें। इसके बाद गणपति जी को जल, अक्षत, रोली, सिंदूर, फूल, दूर्वा, मोदक और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करें।
गणपति पूजा में क्या चढ़ाएं?
भगवान गणेश की पूजा में दूर्वा और मोदक का विशेष महत्व माना जाता है। इसके अलावा भक्त फूल, सिंदूर, अक्षत, फल और मिठाई भी अर्पित करते हैं।
पूजा के दौरान गणेश जी के मंत्रों का जाप और गणेश आरती करना शुभ माना जाता है। परिवार के सभी सदस्य मिलकर आरती करें और भगवान गणेश से सुख, शांति, समृद्धि और परिवार की खुशहाली की प्रार्थना करें।
गणेश चतुर्थी पर व्रत का महत्व
कई भक्त गणेश चतुर्थी के दिन व्रत भी रखते हैं। व्रत रखने वाले लोग अपनी परंपरा और स्वास्थ्य के अनुसार फलाहार या सात्विक भोजन करते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गणेश चतुर्थी का व्रत भगवान गणेश को प्रसन्न करने और जीवन की बाधाओं से मुक्ति की कामना के लिए किया जाता है। हालांकि व्रत की विधि अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रों में अलग हो सकती है।
गणेश चतुर्थी पर चंद्रमा देखने से क्यों बचते हैं?
गणेश चतुर्थी के दिन चंद्र दर्शन को लेकर भी धार्मिक मान्यता जुड़ी हुई है। पंचांग में इस दिन एक विशेष अवधि में चंद्रमा देखने से बचने की सलाह दी जाती है। नई दिल्ली के लिए 2026 में यह अवधि लगभग सुबह 9:06 बजे से रात 8:04 बजे तक बताई गई है।
इससे जुड़ी पौराणिक कथा भगवान गणेश और चंद्रमा से संबंधित है। भक्त इस दिन चंद्र दर्शन से बचने की परंपरा का पालन करते हैं।
कब होगा Ganesh Visarjan 2026?
गणेश उत्सव के दौरान भक्त अपनी परंपरा के अनुसार डेढ़ दिन, तीसरे, पांचवें, सातवें या दसवें दिन गणपति विसर्जन करते हैं। अनंत चतुर्दशी 25 सितंबर 2026, शुक्रवार को है और यह गणेश विसर्जन का प्रमुख दिन माना जाता है।
हालांकि सभी भक्तों के लिए विसर्जन की तारीख एक जैसी नहीं होती। जिन परिवारों में डेढ़ दिन या पांचवें दिन विसर्जन की परंपरा है, वे उसी अनुसार बप्पा को विदाई देते हैं।
विसर्जन के दौरान रखें इन बातों का ध्यान
गणपति विसर्जन श्रद्धा और भावनाओं से जुड़ा अवसर है। विसर्जन के दौरान प्रशासन की ओर से निर्धारित स्थान और नियमों का पालन करना चाहिए।
पर्यावरण की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मिट्टी या प्राकृतिक सामग्री से बनी गणेश प्रतिमा को प्राथमिकता देना बेहतर है। कई शहरों में इको-फ्रेंडली गणेशोत्सव को बढ़ावा दिया जा रहा है। बेंगलुरु में भी इस साल प्राकृतिक मिट्टी और बायोडिग्रेडेबल सामग्री से गणेश प्रतिमा बनाने को लेकर जागरूकता बढ़ाई जा रही है।
विसर्जन के समय नदी, झील या समुद्र में प्लास्टिक, थर्मोकोल और अन्य गैर-बायोडिग्रेडेबल सामग्री नहीं डालनी चाहिए।
देशभर में दिखेगा गणपति उत्सव का उत्साह
गणेश चतुर्थी सिर्फ धार्मिक पर्व ही नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक उत्सव भी है। महाराष्ट्र, कर्नाटक, गोवा, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और देश के कई अन्य हिस्सों में बड़े स्तर पर गणेशोत्सव मनाया जाता है।
मुंबई और पुणे जैसे शहरों में बड़े सार्वजनिक पंडाल आकर्षण का केंद्र रहते हैं। वहीं कर्नाटक के विभिन्न शहरों में भी गणेश उत्सव को लेकर तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। मंगलुरु में 14 से 18 सितंबर तक सार्वजनिक गणेशोत्सव का आयोजन किया जा रहा है।
गणपति बप्पा के स्वागत की तैयारी
गणेश चतुर्थी से पहले भक्त अपने घरों की सजावट करते हैं और पूजा स्थल को फूलों, लाइटों तथा अन्य सजावटी सामग्री से सजाते हैं। बाजारों में गणेश प्रतिमाओं, पूजा सामग्री और सजावट की खरीदारी भी तेज हो जाती है।
इस बार भी लोग पर्यावरण के अनुकूल तरीके से गणेशोत्सव मनाने पर जोर दे रहे हैं। मिट्टी की प्रतिमा, प्राकृतिक रंगों और इको-फ्रेंडली सजावट का इस्तेमाल करके भक्त बप्पा का स्वागत कर सकते हैं।
गणेश चतुर्थी का धार्मिक महत्व
भगवान गणेश को बुद्धि, ज्ञान, समृद्धि और शुभता का प्रतीक माना जाता है। उन्हें विघ्नहर्ता भी कहा जाता है। यही वजह है कि गणेश चतुर्थी पर भक्त पूरी श्रद्धा के साथ भगवान गणेश की पूजा करते हैं।
मान्यता है कि सच्चे मन से गणपति बप्पा की आराधना करने से जीवन में सकारात्मकता आती है और व्यक्ति को अपने कार्यों में सफलता का आशीर्वाद मिलता है।
नोट- Ganesh Chaturthi 2026 इस साल 14 सितंबर, सोमवार को मनाई जाएगी। गणपति स्थापना के साथ गणेशोत्सव की शुरुआत होगी और भक्त अपनी परंपरा के अनुसार अलग-अलग दिनों में बप्पा का विसर्जन करेंगे। प्रमुख अनंत चतुर्दशी विसर्जन 25 सितंबर को होगा।
गणपति बप्पा के स्वागत से लेकर विसर्जन तक श्रद्धा, भक्ति और उत्साह का माहौल रहेगा। अगर आप घर पर गणपति स्थापित करने जा रहे हैं, तो स्थानीय पंचांग के अनुसार शुभ मुहूर्त देखकर पूजा करें और विसर्जन के दौरान पर्यावरण एवं स्थानीय प्रशासन के नियमों का भी ध्यान रखें।
गणपति बप्पा मोरया! मंगलमूर्ति मोरया!

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