B Nagendra Resignation: कर्नाटक की राजनीति में शुक्रवार को बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला, जब राज्य के मंत्री बी. नागेंद्र ने अपने पद से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया। खास बात यह है कि बी. नागेंद्र ने दो साल के भीतर दूसरी बार मंत्री पद छोड़ा है। इससे पहले वर्ष 2024 में भी उन्हें वाल्मीकि निगम से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं के विवाद के बीच मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था।
इस बार भी नागेंद्र का नाम उसी विवाद से जुड़ी राजनीतिक बहस के केंद्र में रहा। उन्होंने इस्तीफे का ऐलान करते समय भावुक होकर अपनी बात रखी और उनकी आंखों से आंसू निकल आए। नागेंद्र ने कहा कि वह अपनी मर्जी से पद छोड़ रहे हैं और अपने ऊपर लगे आरोपों को स्वीकार नहीं करते।
25 दिन पहले ही हुई थी कैबिनेट में वापसी
बी. नागेंद्र की राजनीतिक वापसी ज्यादा लंबी नहीं चल सकी। उन्हें 3 अगस्त 2026 को कर्नाटक मंत्रिमंडल में दोबारा शामिल किया गया था। वापसी के बाद उन्हें योजना और सांख्यिकी विभाग की जिम्मेदारी दी गई।
लेकिन महज 25 दिन बाद ही उन्हें फिर से मंत्री पद छोड़ना पड़ा। उनकी वापसी के बाद विपक्ष ने एक बार फिर वाल्मीकि निगम मामले को लेकर सरकार और नागेंद्र पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। बीजेपी और जेडीएस लगातार इस मुद्दे को उठा रहे थे और उनके इस्तीफे की मांग कर रहे थे।
अब 28 अगस्त को नागेंद्र के इस्तीफे के साथ यह राजनीतिक विवाद एक बार फिर कर्नाटक की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन गया है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में रो पड़े बी. नागेंद्र
इस्तीफे की घोषणा के दौरान बी. नागेंद्र काफी भावुक नजर आए। प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपनी बात रखते हुए उनकी आंखों में आंसू आ गए। उन्होंने कहा कि वह पार्टी और सरकार के लिए किसी तरह की असहज स्थिति पैदा नहीं करना चाहते।
नागेंद्र ने यह भी साफ किया कि उनका इस्तीफा किसी गलती या आरोप को स्वीकार करना नहीं है। उनका कहना था कि वह अपने खिलाफ लगे आरोपों का सामना करेंगे और अपनी बेगुनाही साबित करने की कोशिश करेंगे।
उनकी भावुक प्रेस कॉन्फ्रेंस का वीडियो सामने आने के बाद यह मामला सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बन गया। दो साल में दूसरी बार मंत्री पद से इस्तीफा देने की घटना ने उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर भी नई बहस छेड़ दी है।
2024 में भी देना पड़ा था इस्तीफा
बी. नागेंद्र का यह पहला इस्तीफा नहीं है। इससे पहले जून 2024 में भी उन्होंने सिद्धारमैया सरकार में मंत्री पद छोड़ दिया था। उस समय वह आदिवासी कल्याण विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।
वाल्मीकि निगम से जुड़े कथित फंड ट्रांसफर और वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आने के बाद विपक्ष ने सरकार पर हमला तेज कर दिया था। राजनीतिक दबाव बढ़ने के बाद नागेंद्र ने उस समय भी मंत्री पद से इस्तीफा दिया था।
इसके बाद लंबे समय तक वह मंत्रिमंडल से बाहर रहे। हालांकि, अगस्त 2026 में उन्हें फिर से सरकार में शामिल किया गया। लेकिन उनकी दूसरी पारी भी केवल 25 दिन तक ही चल सकी।
क्या है वाल्मीकि निगम मामला?
बी. नागेंद्र के इस्तीफे के पीछे कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम से जुड़ा कथित वित्तीय अनियमितताओं का मामला है। इस मामले में निगम के फंड के कथित तौर पर अनधिकृत ट्रांसफर को लेकर जांच और राजनीतिक विवाद शुरू हुआ था।
मामले में अलग-अलग एजेंसियों की जांच और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के चलते यह मुद्दा लगातार सुर्खियों में बना रहा। विपक्ष ने इस मामले को कांग्रेस सरकार के खिलाफ बड़ा राजनीतिक हथियार बनाया।
बीजेपी और जेडीएस का आरोप रहा है कि मामले में जवाबदेही तय होनी चाहिए। वहीं, बी. नागेंद्र लगातार अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार करते रहे हैं और खुद को राजनीतिक रूप से निशाना बनाए जाने की बात कहते रहे हैं।
विपक्ष के दबाव ने बढ़ाई मुश्किल
बी. नागेंद्र की कैबिनेट में वापसी के बाद विपक्ष ने अपना विरोध और तेज कर दिया। विधानसभा सत्र के दौरान भी इस मुद्दे पर राजनीतिक टकराव देखने को मिला।
बीजेपी और जेडीएस नेताओं ने सरकार से नागेंद्र को हटाने की मांग की। विपक्ष का कहना था कि जब तक मामले से जुड़े सवालों का समाधान नहीं होता, तब तक नागेंद्र का मंत्री पद पर बने रहना उचित नहीं है।
लगातार राजनीतिक दबाव और बढ़ते विवाद के बीच आखिरकार नागेंद्र ने पद छोड़ने का फैसला किया। हालांकि, उन्होंने अपने इस्तीफे को दबाव में लिया गया फैसला मानने से इनकार किया और कहा कि वह अपनी इच्छा से पद छोड़ रहे हैं।
डीके शिवकुमार सरकार के लिए नई चुनौती
बी. नागेंद्र का इस्तीफा मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के नेतृत्व वाली कर्नाटक सरकार के लिए भी राजनीतिक चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। नागेंद्र की दोबारा कैबिनेट में वापसी पर विपक्ष पहले से सवाल उठा रहा था।
अब केवल 25 दिन के भीतर उनके इस्तीफे ने विपक्ष को सरकार पर हमला करने का एक और मौका दे दिया है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा कर्नाटक की राजनीति में और जोर पकड़ सकता है।
सरकार को अब विपक्ष के आरोपों का जवाब देने के साथ-साथ यह भी स्पष्ट करना होगा कि नागेंद्र की वापसी किन परिस्थितियों में हुई थी और मौजूदा घटनाक्रम के बाद आगे की राजनीतिक रणनीति क्या होगी।
बी. नागेंद्र के राजनीतिक भविष्य पर सवाल
दो साल में दूसरी बार मंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद बी. नागेंद्र के राजनीतिक भविष्य को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। हालांकि, वह विधायक और सक्रिय राजनेता के तौर पर राजनीति में बने रहेंगे या आगे क्या कदम उठाएंगे, इस पर आने वाले दिनों में स्थिति और साफ हो सकती है।
नागेंद्र ने संकेत दिया है कि वह अपने खिलाफ लगे आरोपों का राजनीतिक और कानूनी स्तर पर सामना करेंगे। उन्होंने अपने समर्थकों से भी भावुक अपील की और कहा कि उन्हें न्याय मिलने का भरोसा है।
उनके इस्तीफे के बाद कर्नाटक की राजनीति में नए समीकरण बन सकते हैं। खासतौर पर विपक्ष इस मुद्दे को आने वाले राजनीतिक अभियानों में जोर-शोर से उठा सकता है।
नोट- बी. नागेंद्र का दूसरा इस्तीफा कर्नाटक की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम है। वर्ष 2024 में मंत्री पद छोड़ने के बाद अगस्त 2026 में उनकी वापसी को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना गया था, लेकिन यह वापसी सिर्फ 25 दिन तक ही चल सकी।
इस्तीफे के दौरान उनका भावुक होना इस पूरे घटनाक्रम को और चर्चा में ले आया है। एक तरफ विपक्ष इसे अपनी राजनीतिक जीत के रूप में पेश कर सकता है, वहीं नागेंद्र का कहना है कि उन्होंने कोई गलती नहीं की है और वह आरोपों के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखेंगे।
अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि वाल्मीकि निगम मामले की जांच और राजनीतिक घटनाक्रम आगे किस दिशा में जाता है। साथ ही, डीके शिवकुमार सरकार इस मुद्दे से पैदा हुए राजनीतिक दबाव को कैसे संभालती है और बी. नागेंद्र अपने राजनीतिक करियर की अगली रणनीति क्या तय करते हैं।

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