CEC Gyanesh Kumar News: चुनाव आयोग की Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया को लेकर देश की राजनीति में विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्षी दलों का विरोध तेज हुआ है। शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 को कांग्रेस सहित विपक्षी दलों ने कई जगह प्रदर्शन किए और CEC के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर अपना विरोध दर्ज कराया।
SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना और मृत, स्थानांतरित, डुप्लीकेट या अपात्र नामों की पहचान करना है। हालांकि, इस प्रक्रिया के तरीके और इसके दौरान मतदाताओं के नामों को लेकर विपक्षी दल लगातार सवाल उठा रहे हैं। दूसरी ओर, चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची को अधिक सटीक बनाने और पात्र मतदाताओं को प्रक्रिया के तहत अपने दावे एवं आपत्तियां दर्ज कराने की व्यवस्था पर जोर दिया गया है।
SIR को लेकर क्यों बढ़ा विवाद?
SIR को लेकर सबसे बड़ा विवाद मतदाता सूची में नामों के सत्यापन और हटाए गए नामों को दोबारा शामिल कराने की प्रक्रिया को लेकर है। पश्चिम बंगाल में SIR के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए गए और बाद में बड़ी संख्या में लोगों ने अपील दाखिल की। चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि 27.16 लाख हटाए गए मतदाताओं में से 22 लाख से अधिक ने पुनः शामिल किए जाने के लिए अपील की। कुल मिलाकर 38.31 लाख अपीलें दाखिल हुई थीं।
दिल्ली में भी SIR के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं को नोटिस भेजे गए। इनमें तथाकथित “logical discrepancies” जैसे कारण शामिल रहे। सुप्रीम कोर्ट ने इन नोटिसों की प्रक्रिया और भाषा को लेकर चुनाव आयोग से स्पष्टीकरण मांगा है।
CEC ज्ञानेश कुमार पर विपक्ष का हमला
SIR को लेकर विपक्षी दलों ने CEC ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस ने उनके इस्तीफे की मांग को लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों में प्रदर्शन किए। रिपोर्टों के अनुसार, विपक्षी दल संसद में CEC को हटाने के लिए प्रस्ताव लाने की दिशा में भी चर्चा कर रहे हैं।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि CEC को हटाने की मांग विपक्षी दलों का राजनीतिक रुख है। इसे चुनाव आयोग या न्यायपालिका द्वारा CEC के खिलाफ स्थापित निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
चुनाव आयोग के अंदर भी सामने आईं आपत्तियां
SIR विवाद को और महत्वपूर्ण बनाने वाली एक रिपोर्ट चुनाव आयोग के अंदर से सामने आई है। The Indian Express की 23 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले करीब 10 महीनों में आयोग के कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं पर कम से कम 14 बार औपचारिक आपत्तियां दर्ज कीं। रिपोर्ट के मुताबिक, इन आपत्तियों में मतदाता डेटाबेस तक पहुंच, नए मतदाताओं के आवेदन फॉर्म में बदलाव और मतदाता नामों को हटाने जैसी प्रक्रियाएं शामिल थीं।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि दोनों चुनाव आयुक्तों की कुछ आपत्तियां CEC ज्ञानेश कुमार को भी भेजी गई थीं। हालांकि, इन मुद्दों पर चुनाव आयोग की ओर से संबंधित रिपोर्टों में विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं बताई गई है।
क्या है SIR?
SIR यानी Special Intensive Revision मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया है। इसका उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना और ऐसे नामों की पहचान करना है जो मृत, स्थानांतरित, डुप्लीकेट या अन्य कारणों से सूची में नहीं होने चाहिए।
SIR के दौरान पात्र नागरिकों को अपनी जानकारी और पात्रता से संबंधित दस्तावेज या दावे प्रस्तुत करने का अवसर दिया जाता है। मतदाता सूची से नाम हटाने या शामिल करने को लेकर दावे और आपत्तियां दर्ज करने की प्रक्रिया भी निर्धारित की जाती है।
यही वजह है कि SIR केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं बल्कि मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया से सीधे जुड़ा विषय है।
दिल्ली SIR पर सुप्रीम कोर्ट की नजर
दिल्ली में SIR के दौरान जारी किए गए “logical discrepancy” नोटिसों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने भी सवाल उठाए हैं। अदालत ने चुनाव आयोग से इन नोटिसों के आधार और प्रक्रिया को स्पष्ट करने को कहा है। रिपोर्टों के अनुसार, अदालत ने इस बात पर भी सवाल किया कि क्या कुछ नोटिस मशीन या स्वचालित प्रक्रिया के जरिए जारी किए गए और मतदाताओं को जवाब देने के लिए पर्याप्त स्पष्ट जानकारी दी जा रही है।
चुनाव आयोग की ओर से अदालत के सामने यह कहा गया कि किसी मतदाता का नाम बिना प्रक्रिया और सुनवाई के हटाया नहीं जाएगा।
NDA के कुछ सहयोगियों ने भी मांगी पारदर्शिता
SIR विवाद केवल विपक्ष तक सीमित नहीं रहा। The New Indian Express की 25 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार, NDA के कुछ सहयोगी दलों से जुड़े नेताओं ने भी चुनाव आयोग से स्पष्टीकरण और पारदर्शिता की मांग की है। रिपोर्ट में चिराग पासवान, उपेंद्र कुशवाहा और TDP के लावु श्रीकृष्ण देवरायालु के बयानों का उल्लेख किया गया है।
इससे पता चलता है कि SIR से जुड़े सवालों पर अलग-अलग राजनीतिक दलों की अपनी-अपनी चिंताएं हैं। हालांकि, उनके रुख और मांगें एक जैसी नहीं हैं।
विपक्षी प्रदर्शन क्यों महत्वपूर्ण है?
25 सितंबर को CEC ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्षी प्रदर्शन कई राज्यों तक पहुंचे। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने दिल्ली, चंडीगढ़, लखनऊ और अन्य स्थानों पर विरोध प्रदर्शन किया। मुख्य मांगों में CEC के खिलाफ कार्रवाई और SIR प्रक्रिया को लेकर जवाबदेही से जुड़े मुद्दे शामिल रहे।
वहीं, BJP नेताओं ने विपक्ष की मांगों का विरोध किया है और CEC के खिलाफ प्रस्ताव को लेकर अलग राजनीतिक रुख सामने रखा है।
इस तरह SIR अब चुनावी प्रक्रिया से जुड़े प्रशासनिक मुद्दे के साथ-साथ एक बड़ा राजनीतिक विवाद भी बन गया है।
आगे क्या होगा?
SIR से जुड़े मामलों में आगे की प्रक्रिया चुनाव आयोग, संबंधित राज्य चुनाव अधिकारियों और अदालतों के स्तर पर जारी रहेगी। दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और मतदाताओं के दावों-आपत्तियों की प्रक्रिया महत्वपूर्ण रहेगी। पश्चिम बंगाल में भी हटाए गए मतदाताओं की अपीलों पर सुनवाई जारी है।
CEC ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्ष की राजनीतिक मांगें भी आने वाले दिनों में संसद और सड़कों पर चर्चा का विषय रह सकती हैं। वहीं, चुनाव आयोग से SIR की प्रक्रिया, मतदाता सूची में बदलाव और नोटिस जारी करने के तरीके को लेकर स्पष्टीकरण की अपेक्षा बनी हुई है।
नोट- CEC Gyanesh Kumar News फिलहाल SIR विवाद के कारण सुर्खियों में है। विपक्षी दल CEC पर सवाल उठा रहे हैं और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। दूसरी ओर, SIR को लेकर चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर सुप्रीम कोर्ट की निगरानी और आयोग के भीतर दर्ज आपत्तियों ने इस पूरे मामले को और महत्वपूर्ण बना दिया है।
आने वाले समय में अदालतों की टिप्पणियां, चुनाव आयोग की प्रतिक्रियाएं और राजनीतिक दलों के अगले कदम इस विवाद की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होंगे।

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