Bihar New CM: कौन हैं सम्राट चौधरी? जो बनने जा रहे हैं बिहार के पहले भाजपाई मुख्यमंत्री।
Bihar New CM: बिहार की राजनीति में आज एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद सम्राट चौधरी का नाम बिहार के अगले मुख्यमंत्री के तौर पर मजबूती से उभरा है। सम्राट चौधरी शपथ लेते ही वे बिहार के इतिहास में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पहले मुख्यमंत्री होंगे।
कौन हैं सम्राट चौधरी? बिहार के पहले भाजपाई मुख्यमंत्री बनने का सफर
बिहार की सियासत में ‘नीतीश युग’ के अंत के संकेतों के बीच सम्राट चौधरी एक नए नायक के रूप में सामने आए हैं। वर्तमान में बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे सम्राट चौधरी अब राज्य की कमान संभालने के लिए तैयार हैं।
राजनीतिक परिचय और पारिवारिक पृष्ठभूमि
सम्राट चौधरी का जन्म 16 नवंबर 1968 को बिहार के मुंगेर जिले के तारापुर में हुआ था। वे एक कद्दावर राजनीतिक परिवार से आते हैं। उनके पिता शकुनी चौधरी बिहार की राजनीति के दिग्गज नेता रहे हैं, जो सात बार विधायक और सांसद रह चुके हैं। सम्राट चौधरी कुशवाहा समाज से आते हैं, जिसकी बिहार की राजनीति में बड़ी हिस्सेदारी है।
राजनीतिक सफर: राजद से भाजपा तक
सम्राट चौधरी का राजनीतिक करियर काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है
सबसे युवा मंत्री:- 1999 में राबड़ी देवी की सरकार में वे सबसे कम उम्र के मंत्री बने थे। उस समय उनकी उम्र को लेकर काफी विवाद भी हुआ था।
राजद और जदयू में रहे:- भाजपा में आने से पहले वे लालू प्रसाद यादव की राजद और नीतीश कुमार की जदयू का हिस्सा रह चुके हैं।
भाजपा में उदय:- 2018 में वे भाजपा में शामिल हुए। पार्टी ने उन पर भरोसा जताते हुए उन्हें एमएलसी बनाया, फिर प्रदेश उपाध्यक्ष और बाद में प्रदेश अध्यक्ष की कमान सौंपी।
नीतीश कुमार के मुखर विरोधी
सम्राट चौधरी को नीतीश कुमार के सबसे कड़े विरोधियों में गिना जाता रहा है। उन्होंने सार्वजनिक रूप से ‘मुरेठा’ (पगड़ी) बांधी थी और कसम खाई थी कि जब तक वे नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री की कुर्सी से नहीं हटा देंगे, तब तक यह पगड़ी नहीं खोलेंगे। आज उनकी यह प्रतिज्ञा राजनीति के केंद्र में है।
सम्राट चौधरी ही क्यों?
भाजपा ने सम्राट चौधरी को इस पद के लिए क्यों चुना, इसके पीछे कई रणनीतिक कारण हैं
जातीय समीकरण:- वे पिछड़ा वर्ग (OBC) के बड़े चेहरे हैं। बिहार में ‘कुशवाहा समाज वोट बैंक को साधने के लिए वे सबसे उपयुक्त चेहरा हैं।
आक्रामक नेतृत्व:- सम्राट चौधरी अपनी बेबाक और आक्रामक शैली के लिए जाने जाते हैं, जो भाजपा के कोर कैडर को पसंद आती है।
युवा चेहरा:- 55 वर्ष की उम्र में वे एक ऊर्जावान नेतृत्व प्रदान करते हैं, जो आने वाले 2025 विधानसभा चुनावों में पार्टी के लिए फायदेमंद हो सकता है।
15 अप्रैल को भव्य शपथ ग्रहण समारोह
नए मुख्यमंत्री के नाम के ऐलान के साथ ही शपथ ग्रहण की तैयारियां तेज हो गई हैं। 15 अप्रैल को पटना के राजभवन (लोक भवन) में शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जाएगा। इस ऐतिहासिक पल का गवाह बनने के लिए खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पटना पहुंच सकते हैं। उनके साथ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और बीजेपी के कई दिग्गज नेताओं के शामिल होने की संभावना है।
चुनौतियां और भविष्य
मुख्यमंत्री के तौर पर सम्राट चौधरी के सामने कई चुनौतियां होंगी
गठबंधन के सहयोगियों (जैसे जीतन राम मांझी की पार्टी) को साथ लेकर चलना।
राज्य की कानून-व्यवस्था और विकास कार्यों में तेजी लाना।
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