West Bengal: फलता विधानसभा सीट पर बीजेपी की प्रचंड जीत, जानें किसे मिले कितने वोट?
West Bengal: पश्चिम बंगाल के राजनीतिक रणक्षेत्र से एक बहुत बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। दक्षिण 24 परगना जिले की हाई-प्रोफाइल फलता विधानसभा सीट (Falta Assembly Seat) पर हुए पुनर्मतदान (Repoll) के नतीजों ने पूरे राज्य के सियासी समीकरणों को हिलाकर रख दिया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के अभेद्य गढ़ माने जाने वाले फलता में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवार देवांगशू पांडा (Debangshu Panda) ने ऐतिहासिक और प्रचंड जीत दर्ज की है।
यह नतीजा इसलिए बेहद खास है क्योंकि फलता विधानसभा क्षेत्र, टीएमसी के दूसरे सबसे बड़े नेता अभिषेक बनर्जी के संसदीय क्षेत्र डायमंड हार्बर के अंतर्गत आता है। इस सीट पर मिली रिकॉर्ड जीत के साथ ही पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा में बीजेपी की ताकत बढ़कर 208 सीटों पर पहुंच गई है।
फलता का चुनावी गणित: जानें किसे मिले कितने वोट?
इस चुनाव में सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि जहां एक तरफ बीजेपी ने रिकॉर्ड तोड़ वोट हासिल किए, वहीं सत्ताधारी दल टीएमसी के उम्मीदवार की जमानत तक जब्त हो गई। चुनाव आयोग (ECI) द्वारा जारी किए गए अंतिम आंकड़ों के अनुसार वोट शेयर कुछ इस प्रकार रहा
| उम्मीदवार का नाम | राजनीतिक दल | प्राप्त कुल वोट | स्थिति |
| देवांगशू पांडा | बीजेपी (BJP) | 1,49,666 | विजेता (1,09,021 वोटों से जीत) |
| शंभू नाथ कुर्मी | सीपीआई (एम) [CPI(M)] | 40,645 | दूसरे स्थान पर |
| अब्दुर रज्जाक मुल्ला | कांग्रेस (INC) | 10,084 | तीसरे स्थान पर |
| जहांगीर खान | तृणमूल कांग्रेस (TMC) | 7,783 | चौथे स्थान पर (जमानत जब्त) |
ऐतिहासिक फैक्ट: तृणमूल कांग्रेस के गठन (जनवरी 1998) के बाद से बंगाल के चुनावी इतिहास में यह पहली बार हुआ है जब टीएमसी का कोई उम्मीदवार किसी सीट पर चौथे नंबर पर खिसक गया हो और उसकी जमानत जब्त हो गई हो।
क्यों खास है बीजेपी उम्मीदवार देवांगशू पांडा की यह जीत?
फलता विधानसभा सीट पर शुरुआती मतदान 29 अप्रैल को हुआ था। लेकिन बड़े पैमाने पर ईवीएम के साथ छेड़छाड़, बूथ कैप्चरिंग और मतदाताओं को डराने-धमकाने की शिकायतों के बाद चुनाव आयोग ने कड़ा रुख अपनाया। विशेष पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट के आधार पर पिछले मतदान को रद्द करते हुए 21 मई को सभी 285 बूथों पर दोबारा वोटिंग (Repoll) कराने का आदेश दिया गया था।
पुनर्मतदान के दौरान सुरक्षा के बेहद कड़े इंतजाम किए गए थे। केंद्रीय बलों की करीब 35 कंपनियों की तैनाती के बीच फलता की जनता ने बिना किसी डर के बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और 87% से अधिक रिकॉर्ड मतदान दर्ज हुआ। जब रविवार को वोटों की गिनती शुरू हुई, तो शुरुआत से ही बीजेपी के देवांगशू पांडा ने ऐसी बढ़त बनाई जो आखिरी यानी 22वें राउंड तक लगातार बढ़ती चली गई। उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी वाम मोर्चा (CPIM) के शंभू नाथ कुर्मी को 1 लाख 9 हजार से अधिक वोटों के भारी अंतर से शिकस्त दी।
टीएमसी उम्मीदवार के मैदान छोड़ने से बदला खेल
इस चुनाव का एक दिलचस्प और नाटकीय पहलू टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान का मैदान छोड़ना भी रहा। मतदान से ठीक पहले उन्होंने अचानक घोषणा कर दी कि वह इस चुनाव में हिस्सा नहीं लेंगे। हालांकि, नाम वापसी की समय-सीमा बीत जाने के कारण ईवीएम पर उनका नाम और टीएमसी का सिंबल मौजूद था, लेकिन प्रचार न होने और जनता के आक्रोश के चलते उन्हें महज 7,783 वोट मिले।
जहांगीर खान चुनाव से पहले अपने एक बयान के कारण काफी चर्चा में आए थे, जब उन्होंने केंद्रीय पुलिस पर्यवेक्षक को खुली चुनौती देते हुए कहा था—”अगर वो सिंघम हैं, तो मैं पुष्पा हूं।” लेकिन नतीजों ने इस ‘पुष्पा’ वाले राजनीतिक गुरूर को पूरी तरह धराशायी कर दिया।
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी का पलटवार: “डायमंड हार्बर मॉडल ध्वस्त”
फलता में मिली इस एकतरफा और प्रचंड जीत पर प्रतिक्रिया देते हुए पश्चिम बंगाल के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने टीएमसी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा:
“डायमंड हार्बर का तथाकथित ‘डराने-धमकाने वाला मॉडल’ अब पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है। यह असल में तृणमूल का ‘लॉस-बार मॉडल’ बन गया है। जब लोगों को केंद्रीय बलों की निगरानी में स्वतंत्र और निष्पक्ष रूप से वोट डालने का मौका मिला, तो उन्होंने साफ कर दिया कि बंगाल की जनता अब सिंडिकेट राज और डराने की राजनीति को बर्दाश्त नहीं करेगी।”
निश्चित रूप से, फलता का यह नतीजा सिर्फ एक विधानसभा सीट की जीत नहीं है, बल्कि यह पश्चिम बंगाल की बदली हुई राजनीतिक बयार का एक बड़ा और साफ संकेत है।

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