Vat Savitri Samagri List: वट सावित्री पूजा की थाली में जरूर शामिल करें ये 10 चीजें, इसके बिना अधूरी मानी जाती है बरगद पूजा

Vat Savitri Puja Samagri List: ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को मनाया जाने वाला वट सावित्री व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास और पवित्र माना जाता है।

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Vat Savitri Samagri List: वट सावित्री पूजा की थाली में जरूर शामिल करें ये 10 चीजें, इसके बिना अधूरी मानी जाती है बरगद पूजा

Vat Savitri Puja Samagri List: ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को मनाया जाने वाला वट सावित्री व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास और पवित्र माना जाता है। इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, अच्छी सेहत और सुख-समृद्धि के लिए पूरे दिन निर्जला या फलाहार व्रत रखती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन माता सावित्री ने अपने दृढ़ संकल्प और सतीत्व के बल पर यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस छीन लिए थे।

वट सावित्री व्रत में जितना महत्व कथा और उपवास का है, उतना ही महत्व सही विधि-विधान से पूजा करने का भी है। शास्त्रों के अनुसार, अगर पूजा की थाली में जरूरी सामग्रियां न हों, तो पूजा अधूरी मानी जाती है और व्रत का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता।

अगर आप भी इस साल वट सावित्री का व्रत रख रही हैं, तो पूजा पर जाने से पहले अपनी थाली में इन 10 चीजों को शामिल करना बिल्कुल न भूलें। आइए जानते हैं बरगद पूजा की संपूर्ण सामग्री लिस्ट (Vat Savitri Puja Samagri List) के बारे में।

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वट सावित्री पूजा की थाली की 10 सबसे जरूरी चीजें (Vat Savitri Samagri List)
बरगद (वट) के पेड़ में ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों देवों का वास माना जाता है। इसलिए इसकी पूजा पूरी श्रद्धा और सही सामग्री के साथ करनी चाहिए। अपनी थाली में इन चीजों को जरूर रखें:

1. कच्चा सूत (कलावा या सूती धागा)
वट सावित्री पूजा में कच्चे सूत का सबसे बड़ा महत्व है। बरगद के पेड़ की परिक्रमा करते समय सुहागिन महिलाएं इसके तने पर कच्चा सूत लपेटती हैं। माना जाता है कि यह धागा पति-पत्नी के रिश्ते को मजबूत करता है। अगर कच्चा सूत न मिले, तो आप रक्षासूत्र (मौली) का उपयोग भी कर सकती हैं।

2. बांस का पंखा (Hand Fan)
इस व्रत में बांस से बने हाथ वाले पंखे का होना अनिवार्य है। पूजा के दौरान इस पंखे से वट वृक्ष और सत्यवान-सावित्री को हवा झली जाती है। इसके बाद इस पंखे को दान करने की भी परंपरा है।

3. सुहाग की सामग्री (सोलह श्रृंगार)
माता सावित्री को चढ़ाने के लिए एक लाल चुनरी और सुहाग का डिब्बा जरूर रखें। इसमें मुख्य रूप से सिंदूर, बिंदी, चूड़ियां, मेहंदी, आलता, काजल और बिछिया शामिल होना चाहिए। पूजा के बाद इस सुहाग के सामान को किसी सुहागिन महिला या ब्राह्मण को दान कर दें।

4. भीगे हुए चने
वट सावित्री पूजा में भीगे हुए काले चने का विशेष महत्व है। पूजा के दौरान चने को प्रसाद के रूप में वट वृक्ष की जड़ में अर्पित किया जाता है। व्रत पारण के समय भी सुहागिन महिलाएं चने निगलकर अपना व्रत खोलती हैं।

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5. मौसमी फल (विशेषकर आम और लीची)
इस मौसम में आने वाले फल जैसे पका हुआ आम, लीची, केला और खरबूजा पूजा की थाली में जरूर रखें। फल हमेशा जोड़े में होने चाहिए।

6. पकवान (पूरी और बरगद/गुलगुले)
घर पर शुद्ध घी या तेल में बनी हुई पूरियां और आटे-गुड़ से बने पारंपरिक ‘बरगद’ (एक प्रकार का मीठा पकवान) बनाकर थाली में रखें। इसे वट वृक्ष को नैवेद्य के रूप में भोग लगाया जाता है।

7. जल से भरा कलश
सत्यवान और यमराज की मिट्टी की मूर्तियों (या प्रतीक रूप) और वट वृक्ष को अर्घ्य देने के लिए तांबे या पीतल के लोटे में शुद्ध जल गंगाजल मिलाकर अवश्य रखें।

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8. अक्षत, रोली और चंदन
पूजा की शुरुआत तिलक से होती है। इसलिए अटूट दाने वाले चावल (अक्षत), रोली (कुमकुम) और पीला या सफेद चंदन अपनी थाली में सजाएं।

9. धूप, दीप और माचिस
आरती और शुद्धिकरण के लिए गाय के घी का दीपक, कपूर और सुगंधित अगरबत्ती या धूपबत्ती साथ रखें।

10. सिक्का (दक्षिणा)
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, कोई भी पूजा तब तक पूर्ण नहीं होती जब तक उसमें दक्षिणा न चढ़ाई जाए। पूजा की थाली में कुछ सिक्के या नोट जरूर रखें, जिसे बाद में दान किया जा सके।

पूजा करते समय ध्यान रखें ये बातें
सत्यवान-सावित्री की कथा:- बरगद के पेड़ के नीचे बैठकर सत्यवान और सावित्री की पौराणिक कथा जरूर सुनें या पढ़ें।

परिक्रमा का नियम:- वट वृक्ष की परिक्रमा हमेशा क्लॉकवाइज (घड़ी की सुई की दिशा में) करें। कम से कम 7 बार या सामर्थ्य के अनुसार 108 बार परिक्रमा कर धागा लपेटें।

बुजुर्गों का आशीर्वाद:- पूजा संपन्न होने के बाद घर के बड़े-बुजुर्गों और सास के पैर छूकर आशीर्वाद लें और उन्हें सुहाग की सामग्री भेंट करें।

इस वट सावित्री व्रत में इन सभी आवश्यक सामग्रियों को अपनी थाली में शामिल कर माता सावित्री और वट देव की कृपा प्राप्त करें।

आप सभी को वट सावित्री व्रत की हार्दिक शुभकामनाएं!

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