Kerala Election Results 2026: केरल में ‘लाल किला’ ध्वस्त, 102 सीटें जीतकर UDF की बंपर वापसी।
Kerala Election Results 2026: केरल की जागरूक जनता ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वे सत्ता विरोधी लहर (Anti-Incumbency) को पहचानने में देर नहीं करते। 2026 के विधानसभा चुनाव परिणामों में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) ने अभूतपूर्व प्रदर्शन करते हुए 140 सीटों वाली विधानसभा में 102 सीटों पर कब्जा कर लिया है। इसके साथ ही, पिछले एक दशक से राज्य की सत्ता पर काबिज एलडीएफ (LDF) मात्र 35 सीटों पर सिमट गई है।
विजयन का ‘तिलिस्म’ और मंत्रियों की करारी हार
मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन, जिन्हें वामपंथी राजनीति का ‘कैप्टन’ माना जाता था, उनके नेतृत्व वाली सरकार के खिलाफ जनता का भारी गुस्सा देखने को मिला। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, विजयन कैबिनेट के 13 मंत्री अपनी सीटें नहीं बचा पाए। स्वास्थ्य मंत्री वीणा जॉर्ज और उद्योग मंत्री पी. राजीव जैसी बड़ी हस्तियों की हार ने यह साफ कर दिया कि जनता पूरी तरह बदलाव के मूड में थी। हालांकि, विजयन अपनी धर्माडम (Dharmadam) सीट बचाने में सफल रहे, लेकिन उनकी सरकार के खिलाफ चली ‘सुनामी’ ने पूरे राज्य में वामपंथ के पैर उखाड़ दिए।
UDF की वापसी के मुख्य कारण
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि केरल में कांग्रेस और उसके सहयोगियों की इस जीत के पीछे तीन प्रमुख कारण रहे:
भ्रष्टाचार और भाई-भजीजावाद के आरोप: पिछले कुछ वर्षों में एलडीएफ सरकार पर लगे भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों ने आम जनता और विशेष रूप से युवाओं को नाराज किया।
राहुल गांधी और वीडी सतीशन का नेतृत्व: राहुल गांधी की केरल में निरंतर सक्रियता और विपक्ष के नेता वीडी सतीशन के आक्रामक कैंपेन ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं में नई जान फूँक दी।
मुस्लिम लीग (IUML) का शानदार प्रदर्शन: मालाबाद क्षेत्र में IUML ने रिकॉर्ड 22 सीटें जीतकर UDF की जीत की नींव रखी। यहाँ तक कि मल्लपुरम जिले की सभी 16 सीटों पर UDF ने पहली बार क्लीन स्वीप किया है।
बीजेपी ने भी रचा इतिहास
भले ही मुख्य मुकाबला UDF और LDF के बीच था, लेकिन बीजेपी (BJP) ने भी इस बार केरल में अपनी ऐतिहासिक मौजूदगी दर्ज कराई है। बीजेपी ने नेमम (Nemom), कझाकूटम और चाथनूर सहित 3 सीटों पर जीत दर्ज की है। पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर की नेमम से जीत यह संकेत देती है कि केरल की द्विध्रुवीय राजनीति अब त्रिकोणीय मुकाबले की ओर बढ़ रही है।
सत्ता का नया समीकरण
अब केरल में सरकार बनाने की कवायद तेज हो गई है। कांग्रेस मुख्यालय पर जश्न का माहौल है और वीडी सतीशन को मुख्यमंत्री पद का प्रबल दावेदार माना जा रहा है। पिनाराई विजयन ने राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। हार स्वीकार करते हुए सीपीआई(एम) राज्य सचिव एम.वी. गोविंदन ने कहा, “यह परिणाम हमारे लिए अप्रत्याशित हैं। हम हार के कारणों का गहराई से विश्लेषण करेंगे।”
केरल का यह चुनाव परिणाम दक्षिण भारत की राजनीति के लिए एक बड़ा संदेश है, जहाँ कांग्रेस ने कर्नाटक और तेलंगाना के बाद अब केरल में भी अपनी मजबूत पकड़ बनाकर 2029 के लोकसभा चुनावों के लिए विपक्ष को संजीवनी दे दी है।

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